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लापरवाह लोगों को रोकने वाले नदारद

टनल पर चेतवानी बोर्ड के बावजूद रुक रहे यात्री...

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सिरोही. मातरमाता पहाड़ी स्थित टनल पर शुक्रवार को मलबे में दबने से चार श्रमिकों की मौत के बाद भी रखरखाव करने वाली कंपनी की ओर से लापरवाही बरती जा रही है। टनल पर आए दिन चट्टानें गिरने के बावजूद दिनभर लोगों को सेल्फी लेते देखा जा रहा है। हालांकि यहां कंपनी की ओर से सेल्फी नहीं लेने का चेतावनी बोर्ड लगा हुआ है। इसका कारण हाइ-वे पैट्रोलिंग करने वाले निरीक्षकों की अनदेखी है। मंगलवार को भी लोगों को यहां सेल्फी लेते देखा गया। टनल पर हादसा होने के बाद इस मार्ग पर नियमित गश्त होनी चाहिए ताकि फिर हादसा नहीं हो सके।

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यहां ज्यादा समस्या
दूधिया तालाब से सटी पहाड़ी से लेकर मातर माता, सार्दुलपुरा कॉलोनी के ऊपर, निड़ोरा तालाब के बहाव क्षेत्र, टनल के दोनों भाग में, वाजणा गणेश झरने के पास तथा बाहरीघाटा हनुमान मंदिर के आगे की पहाड़ी अक्सर बारिश के समय में गिरती है।

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इस दिन हुआ था हादसा

टनल पर काम करते मलबे में दबे श्रमिक
फोरलेन पर बाहरी घाटा की पहाडिय़ों में स्थित टनल के मुहाने पर दोपहर में पत्थरों का मलबा गिरने से चार श्रमिक दब गए। जानकारी के अनुसार श्रमिक चट्टानों पर जाली लगाने का कार्य कर रहे थे। इस दौरान पहाड़ी का मलबा गिरने से उथमण निवासी देवीसिंह, उत्तम कुमार, पताराम व पोसालिया निवासी महेन्द्र नीचे दब गए। चारों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना के बाद प्रशासन, पुलिस व एलएंडटी कम्पनी के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। करीब घंटाभर की मशक्कत के बाद चारों शव निकाल लिए गए।

दस लाख के मुआवजे पर उठाएं थे
शव

सिरोही। फोरलेन हाइवे पर बारीघाटा टनल के मुहाने पर मलबा गिरने से चार श्रमिकों की मौत के मामले में शनिवार सुबह नर्सिंग प्रशिक्षण केन्द्र के एक बंद कमरे में करीब ढाई घंटे समझौता वार्ता चली। इस दौरान आश्रितों को 10-10 लाख रुपए, नौकरी व नियमानुसार अन्य परिलाभ देने की सहमति बनने पर परिजन शव उठाने का राजी हुए। इससे पूर्व लोगों ने मृतकों के आश्रितों को 30-30 लाख रुपए का मुआवजा, पेंशन व नौकरी देने की मांग को लेकर शव उठाने से इनकार कर दिया था। जिस पर गोपालन राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, अतिरिक्त जिला कलक्टर आशाराम डूडी, एसडीएम नाथूसिंह राठौड़, भाजपा जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी, भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष गणपतसिंह राठौड़ की मध्यस्थता में परिजनों व एलएंडटी कम्पनी के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई। मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों की ओर से शव नहीं उठाने पर विवाद की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस जाप्ता तैनात रहा। कोतवाली थाने में कम्पनी के जिम्मेदार अधिकारियों सहित अन्य के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (आईपीसी की धारा 304) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

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