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Granite Industry: सरकार की मंजूरी का इंतजार, आबूरोड बन सकता है ग्रेनाइट हब, 1.50 अरब रुपए के निवेश की संभावनाएं

Aburoad Granite Industry: आबूरोड रीको क्षेत्र में ग्रेनाइट उद्योग तेजी से उभर रहा है, लेकिन नीति में बदलाव की प्रतीक्षा में इसका विस्तार अटका हुआ है।

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रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्थित ग्रेनाइट इकाई। फोटो- पत्रिका

आबूरोड। शहर के रीको का ग्रेनाइट देश-विदेश तक चमक बिखेर रहा है। यदि सरकार ध्यान दे तो इस उद्योग के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। उद्यमी यहां ग्रेनाइट इकाइयां स्थापित करना चाहते हैं। कुछ ने रीको से जमीन भी खरीदी है, लेकिन वे राज्य सरकार की एक जिला, एक उत्पाद योजना में सिरोही जिले में मार्बल के स्थान पर ग्रेनाइट उद्योग को शामिल किए जाने का इंतजार कर रहे हैं।

यदि सरकार उत्पाद में बदलाव करे तो करीब डेढ़ अरब रुपए का निवेश होने और 400 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके लिए उद्योगपति लंबे समय से प्रयासरत हैं, लेकिन अभी तक सरकार ने इसमें बदलाव की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। उद्योगपतियों का कहना है कि जिले में मार्बल उद्योग अब कम होता जा रहा है, जबकि ग्रेनाइट उद्योग चमक रहा है।

ग्रेनाइट की मांग ज्यादा

शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में 100 से अधिक ग्रेनाइट इकाइयां संचालित हैं। इसके अलावा करीब 30 ऐसी मार्बल इकाइयां हैं, जिनमें भी अब ग्रेनाइट का कारोबार किया जा रहा है। जबकि जिलेभर के औद्योगिक क्षेत्रों में मार्बल व मार्बल आर्टिकल की कुल 100 ही इकाइयां हैं। वर्तमान में भवन निर्माण कार्यों में ग्रेनाइट की मांग बढ़ी है। ऐसे में नए उद्यमी मार्बल इकाई लगाने में हिचकिचा रहे हैं।

वे इस उद्योग में मुनाफे को लेकर आशंकित हैं। एक जिला, एक उत्पाद योजना में नवीन मार्बल इकाई पर सब्सिडी व अन्य रियायतें मिलने के बावजूद वे जोखिम लेना पसंद नहीं कर रहे हैं। योजना लागू हुए करीब डेढ़ वर्ष बीत चुके हैं, जबकि अब तक आबूरोड में सिर्फ दो नई मार्बल इकाइयां ही स्थापित हुई हैं। वहीं योजना में मार्बल के स्थान पर ग्रेनाइट शामिल करने पर एक दर्जन से अधिक उद्यमी नई इकाइयां लगाने को तैयार हैं।

टाइल्स उद्योग से प्रतिस्पर्धा

वर्तमान में ग्रेनाइट उद्योग को टाइल्स उद्योग से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि टाइल्स की दरें ग्रेनाइट से कम हैं। उद्यमी चाहते हैं कि ग्रेनाइट पर 18 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए, साथ ही सब्सिडी दी जाए व रॉयल्टी की दर कम की जाए। राजस्थान सरकार एक जिला, एक उत्पाद योजना में ग्रेनाइट को शामिल करने पर गंभीरता दिखाए तो उन्हें प्रोत्साहन मिल सकता है। गौरतलब है कि आबूरोड में टाइल्स बनाने की एक भी इकाई नहीं है। अधिकांश माल गुजरात के मोरबी से मंगवाया जाता है।

उद्योगी मंत्री ने दिया आश्वासन

गत 19 मार्च को उद्योग राज्य मंत्री केके विश्नोई के सिरोही दौरे पर आबूरोड मार्बल एसोसिएशन के पदाधिकारियों व उद्यमियों ने एक जिला, एक उत्पाद योजना में सिरोही जिले में ग्रेनाइट को शामिल करने का आग्रह किया था। इस पर उन्होंने उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।

इनका कहना है

आबूरोड में करीब 15 उद्यमी ग्रेनाइट इकाइयां लगाना चाहते हैं। कुछ ने जमीन भी खरीदी है। एक जिला, एक उत्पाद में ग्रेनाइट शामिल किया जाए तो ये इकाइयां लग सकती हैं। इस बारे में हमने उद्योग राज्यमंत्री से मांग की है। ग्रेनाइट पर जीएसटी 5 प्रतिशत किया जाए।

  • भगवान अग्रवाल, अध्यक्ष, आबू मार्बल एसोसिएशन, आबूरोड