
Abu Road - Urban PHC or fun!
बिना डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ व जरूरी उपकरणों के कोई अस्पताल चल सकता है क्या और वह भी सरकारी अस्पताल। बेशक आपका जवाब 'नाÓ होगा, पर दावे का साथ कहा जा सकता है कि आपका जवाब गलत है, क्योंकि आबूरोड में ऐसा ही एक अस्पताल चल रहा है और वह भी सरकारी अस्पताल। आप आबूरोड के वाशिंदे है, पर आपको भी यह पता नहीं होगा कि शहर में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के अलावा कोई शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भी चल रहा है। फिर भी यह सच है कि यह अरबन पीएचसी चल रहा है। यह दीगर बात है कि इस अरबन पीएचसी की जानकारी सिर्फ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को ही है, लोगों को नहीं। कुल मिलाकर बात इतनी है कि सरकार ने शहर के लिए एक अलग से अरबन पीएचसी सेन्टर स्वीकृत कर दिया तो विभाग ने इसे शहरी क्षेत्र के आकराभट्टा स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र (सब सेन्टर) में ही शुरू कर दिया। दिलचस्प बात तो यह है कि महज कागजी और कपोल कल्पित इस अरबन सेन्टर में न तो कोई डॉक्टर लगा हुआ है और न ही कोई नर्सिंग या अन्य स्टाफ। उपकरण के नाम पर ब्लड प्रेशर मापने का उपकरण या स्टेथोस्कोप तक नहीं है। यहां तक कि इसका अलका भवन भी नहीं है। फिर भी अरबन पीएचसी चल रहा है।
ऐसे अस्तित्व में आया अरबन पीएचसी
दरअसल हुआ यह कि सरकार ने सितम्बर,2015 में शहरवासियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मयस्सर कराने के मकसद से एक अरबन पीएचसी स्वीकृत किया। इसे शहर में कहीं शुरू करना था। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने काफी हाथ-पांव मारे, पर कहीं किराए के भवन का जुगाड़ नहीं हो पाया तो अंतत: आकराभट्टा सब सेन्टर में ही इसे चलाने का निर्णय किया गया। तब से यह कथित अरबन पीएचसी उसी में चल रहा है। जाहिर है कि डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ और उपकरणों के अभाव में यह महज कागजों में ही चल रहा है। शहरवासियों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा।
मौजूदा सीएचसी भवन खाली होने पर बनेगी बात
करीब सवा साल पूर्व जब अरबन पीएचसी स्वीकृत हुआ, उस दौरान मौजूदा सरकारी अस्पताल के लिए नया भवन बनाकर इसे उसमें शिफ्ट करने तथा अरबन पीएचसी को मौजूदा सरकारी अस्पताल भवन में शुरू करने का निर्णय किया गया था। मौजूदा सरकारी अस्पताल के लिए नया भवन बनाने की प्रक्रिया में काफी समय जाया हो जाने से भवन निर्माण का कार्य विलम्ब से शुरू हुआ जो अभी भी निर्माणाधीन है। भवन निर्माण कार्य जून से पहले पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं है। भवन तैयार होने के बाद ही मौजूदा सरकारी अस्पताल को उसमें शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद ही आकराभट्टा सब सेन्टर में चलने वाले इस अरबन पीएचसी को मौजूदा सरकारी अस्पताल भवन में शुरू किया जा सकेगा और शहरवासियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। अभी सप्ताहभर पूर्व ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में हुई बैठक में मौजूदा अस्पताल भवन को अरबन पीएचसी के लिए देने का निर्णय किया गया।
ढंूढने पर भी नहीं मिल रहा कोई रिटायर्ड डॉक्टर
दरअसल अरबन पीएचसी में प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत डॉक्टर (जो पैसठ साल से कम आयु का हो) लगाया जाएगा, जो सुबह चार घंटे और शाम को दो घंटे सेवाएं देगा। दो जीएनएम, एक लैब टेक्निशियन, एक नर्स लगेगी। पीएचसी के लिए जरूरी तमाम उपकरण लगेंगे। हालांकि इनके लिए बीसीएमओ ने प्रस्ताव तो बनाकर भेजा हुआ है, लेकिन अभी तक मिला कुछ नहीं है। विभाग ने इसके लिए सेवानिवृत डॉक्टर की भी खूब तलाश की, लेकिन अभी तक ऐसा कोई डॉक्टर नहीं मिला जो अरबन पीएचसी में सेवाएं देने के लिए तैयार हो। डॉक्टर को सरकार की ओर से प्रतिमाह चालीस हजार रुपए का पारिश्रमिक दिया जाएगा। वह नियमित रूप से पीएचसी में सेवाएं देने के साथ प्रति माह शहर के एक वार्ड में आउटरीच केम्प भी लगाएगा और एमसीएचएन दिवस पर टीकाकरण का कार्य भी करवाएगा।
गांधीनगर में अभी सब सेन्टर का भी प्रस्ताव नहीं
वैसे गांधीनगर की आबादी और रेलवे फाटक के कारण लोगों को उपचार के लिए शहर में आने की परेशानियों के मद्देनजर वहां के वाशिंदे गांधीनगर में अरबन पीएचसी खोलने की लम्बे अर्से से मांग कर रहे है, पर अभी तक तो ऐसी कोई हलचल नहीं हुई। यहां तक की अरबन सब सेन्टर खुलवाने का भी किसी राजनेता ने विभाग के जरिए सरकार को प्रस्ताव नहीं भेजा है। गांधीनगर के वाशिंदे नगर पालिका से भी कई बार सब सेन्टर के लिए जमीन आवंटित करने की मांग कर चुके है, पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। विभाग के अधिकारियों से बात करने पर उन्होंने बताया कि गांधीनगर में अरबन सब सेन्टर खुलवाने के लिए वे शीघ्र ही प्रस्ताव बनाकर भेज देंगे। राजनेता दम लगाएंगे तो गांधीनगर वासियों को चिकित्सा सेवा गांधीनगर में ही मयस्सर हो सकती है।
इन्होंने बताया ...
भवन नहीं मिलने से फिलहाल तो हमने अरबन पीएचसी को सब सेन्टर में ही शुरू किया हुआ है। यह भी सच है कि सेवानिवृत डॉक्टर नहीं मिलने से अभी कोई डॉक्टर नहीं लगा है। नर्सिंग स्टाफ भी नहीं लगा है। उपकरण भी नहीं मिले है। सीएचसी नए भवन में शिफ्ट होने के बाद इसे सब सेन्टर से मौजूदा सरकारी अस्पताल भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। गांधीनगर में सब सेन्टर खुलवाने का प्रस्ताव शीघ्र ही तैयार कर भिजवा दिया जाएगा।
- डॉ. गौतम मोरारका, बीसीएमओ, आबूरोड।
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