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पांच सौ रुपए से जिंदा है बाबू खान

बाबू खान का उपचार कर रहे चिकित्सकों ने कीमोथैरेपी करवाने की सलाह दी है, मगर खर्च बहुत है। मुंह के कैंसर के उपचार में सर्जरी के गलत प्रभाव होते हैं। तीसरे या चौथे चरण में चिकित्सक कीमोथैरेपी की सलाह देते हैं।

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Amar Singh Rao

Jul 01, 2017

Babu Khan is alive for five hundred rupees

Babu Khan is alive for five hundred rupees


सरूपगंज . बाबू खान करीब साल भर से कैंसर से पीडि़त है। उसे महंगे उपचार के लिए सरकारी सहायता नहीं मिल पा रही है। वह मुंह के कैंसर के कारण पानी तक नहीं पी सकता। पिता की वृद्धावस्था पेंशन 500 रुपए के सहारे नाम मात्र के उपचार से जीवित है। सरूपगंज निवासी बाबू खान ने बताया कि वह कामकाज नहीं कर सकता। बाबू खान पानी भी हलक से नहीं उतार सकता है। बीमारी के कारण गले की नली सिकुड़ गई है, जिससे पानी जाते ही असहनीय दर्द होने लगता है। इसलिए करीब तीन माह से खाना भी नहीं खाया है। आर्थिक तंगी के कारण खुदा से रोज मदद की दुआ मांगता है।
न बीपीएल और न ही भामाशाह कार्ड
पिता पन्ने खान ने बताया कि समाजसेवी मुश्ताक अहमद नागौरी ने 2007 में उसे बीपीएल परिवार से जोडऩे की अपील की थी मगर आज तक नहीं जुडऩे से सरकारी सहायता से उपचार नहीं हो पा रहा है। भामाशाह कार्ड भी बनवाने के लिए आवेदन किया, मगर आज तक नहीं आया।
कीमोथैरेपी की आवश्यकता
बाबू खान का उपचार कर रहे चिकित्सकों ने कीमोथैरेपी करवाने की सलाह दी है, मगर खर्च बहुत है। मुंह के कैंसर के उपचार में सर्जरी के गलत प्रभाव होते हैं। तीसरे या चौथे चरण में चिकित्सक कीमोथैरेपी की सलाह देते हैं। इससे भी रोगी के शरीर पर कई प्रभाव देखे जाते हैं। अंतिम चरण में रोगी को बचाने के लिए मात्र रेडियोथैरेपी ही सहारा है। इसमें मशीन से ट्यूमर पर किरणें डालकर कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जाता है।

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