
माउंट आबू. वनसंपदा को चपेट में लेता दावानल। फाइल फोटो
माउंट आबू. क्षेत्र में दुर्लभ वन सम्पदा, जीवनरक्षक वनौषधियों के क्षरण के साथ जैव विविधता को खतरा उत्पन्न हो गया है। अंतरराष्ट्रीय संगठन आईयूसी ने यहां की विभिन्न दुर्लभ प्रजातियों को रेड डाटा बुक में इंद्राज किया है। साथ ही इनके शीघ्र विलुप्त होने के संकेत दिए हैं।
ऐसे में जंगल व वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरे की के संकेत नजर आने लगे हैं। लेकिन इस वन सम्पदा को बचाने को लेकर कोई कारगर उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
ये वनस्पति केवल माउंट में
वन विभाग के अनुसार डिकिल्पटेरा, आबू ऐनेसिस जैसी दुर्लभ प्रजातियों की वन संपदा केवल माउंट आबू में ही पाई जाती है। स्ट्रोबिलेन्थस कैलोसस जिसे स्थानीय भाषा में कारा के नाम से जाना जाता है, भी अब केवल माउंट आबू के कुछ ही वन्यक्षेत्र तक सिमट कर रह गया है। जंगली गुलाब, फरन जैसी दुर्लभ प्रजातियां आज भी यहां के वनों की शोभा बढ़ा रही है। वनौषधियों में जड़ी-बूटियों की दृष्टि से यह राज्य का सर्वाधिक समृद्ध क्षेत्र बताया जाता है।
हो रहा अवैध दोहन
क्षेत्र की वन सम्पदा व वनौषधियों का व्यापक स्तर पर अवैध दोहन भी हो रहा है। जानकारी के अभाव में वनौषधियों के पौधे जड़ से ही उखाड़ दिए जाते हैं। तथा कथित दोहन से वनसम्पदा, वनौषधि बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
रेड डाटा बुक में दर्ज है ये प्रजातियां
आईयू्सी ने अपनी रेड डाटा बुक में एनोगरसस रेसिया (धोकड़ा), वेगोनिया ट्राई कोकारपा, क्रोटो-लेटिमा (फिलिप), इडि गोफेशकोन्सट्राटा प्रजाति समेत कई अन्य पौधों के लुप्त होने की चेतावनी दी है।
वन्यजीव, दुलर्भ वनस्पति के दावानल की भेंट चढऩे से इनके लुप्त होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसे बचाने को फिलवक्त विभाग के पास कोई कारगर योजना नहीं है।८२० प्रजाति की है यहां वनस्पति
वन विभाग के अनुसार माउंट वन मंडल क्षेत्र में करीब ८२० प्रजाति की वनस्पतियां उपलब्ध है। जिनमें ३०० से अधिक वृक्ष, झाडिय़ां, लता आदि प्रजातियों में शुमार है। इसके अलावा १७ कंदमूल, ८१ वृक्ष, २८ बेल, ८९ झाड़ी के रूप में औषधिय प्रजातियां प्रमुख है, लेकिन वास्तविक धरातल पर स्थिति कुछ और है। पिछले दिनों भड़के सदी का सर्वाधिक विनाशकारी दावानलों ने उजाडऩे में कसर नहीं छोड़ी।
Published on:
21 May 2018 08:41 am
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