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करोड़ों की आय फिर भी स्टाफ और संसाधन का टोटा, – सरकार की अनदेखी, मत्स्य विभाग में जुगाड़ से चल रहा काम

- सरकार की अनदेखी, मत्स्य विभाग में जुगाड़ से चल रहा काम

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- सरकार की अनदेखी, मत्स्य विभाग में जुगाड़ से चल रहा काम

सिरोही. जिले में मत्स्य विभाग के माध्यम से प्रतिवर्ष डेढ़-दो करोड़ रुपए की आय से सरकार ने नजरें फेर रखी हैं। हालात ये हंै कि जिला मुख्यालय पर कई पद रिक्त होने के साथ बांधों की निगरानी के लिए वाहन भी नहीं हैं। कर्मचारियों को बस या फिर किराए के वाहनों से निगरानी के लिए आना-जाना पड़ता है। ऐसे में राज्य व केन्द्र सरकार की योजनाओं का संचालन करना भी चुनौती साबित हो रहा है। विभाग में कर्मचारियों की कमी से उत्पादन ही नहीं, बल्कि विपणन पर भी खासा प्रभाव पड़ रहा है।
मत्स्य पालन विभाग जिले के जलाशयों में मछली पालन के ठेके देता है। विभागीय दृष्टि से जलाशयों को दो श्रेणियों में रखा है। क श्रेणी के बड़े तालाबों के ठेके विभागीय स्तर तथा ख के जिला परिषद में ठेके होते हैं। क श्रेणी के पश्चिमी बनास 25 लाख 54 हजार 400, अणगौर में 38 लाख 92 हजार 755, सरूपसागर में 1 लाख 20 हजार 527, वासा में एक लाख के ठेके हुए हैं। भैसासिंह, कादम्बरी, कमेरी, सुकली सेलवाड़ा के ठेके बाकी हैं। ये आठ जलाशय ही सालाना एक करोड़ पैंतालीस लाख रुपए का राजस्व सरकार को देते हैं। ख श्रेणी के वराल, गिरवर, बुटड़ी, मूंगथला, केर, कुई सांगणा, उडवारिया, निम्बोड़ा, चन्डेला, धांता, बरलूट, जीरावल, करेली, पंचदेवल, माण्डवाड़ा, बडेची एवं करोड़ी ध्वज इन 18 छोटे बांधों से सरकार को करीब 43 लाख का राजस्व मिलता है।

मत्स्याखेट पर प्रतिबंध
वर्षाकाल यानी 16 जून से 31 अगस्त तक मछलियों के प्रजनन का समय होने की वजह से जलाशयों, नदियों में मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। पशुपालन विभाग के शासन उप सचिव ने भी इसके लिए जिलों में सख्त निर्देश दिए हैं।

इनका कहना है...
2018-19 के ठेके करीब सभी बांधों के हो गए हंै।इससे सालाना करीब डेढ़ से दो करोड़ की आय होती है। विभाग में पद रिक्त हैं।
-धर्मेश सोढ़ानी, जिला मत्स्य अधिकारी, सिरोही

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