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खुले में जल रहा चूल्हा, तिरपाल के नीचे गुजर रही रात

-गत वर्ष अतिवृष्टि में ढह गया था गरीब का आशियाना, अब तक नहीं मिली मदद

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सिरोही मस्जिद मार्ग टूटा मकान व धूप में पड़ा घर का सामान।

सिरोही. साहब! मेरी दो बेटियां और दो बेटो सहित छह सदस्यों का परिवार है। इनमें दोनों बेटियों के हाथ पीले करने हैं। पूर्व में किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर सिर ढकने के लिए दो कमरों का मकान बनाया था। जिसके भी एक कमरे में मेरा देवर अनवर खां रहता था। वहीं एक कमरे में मेरे परिवार का आशियाना था। लेकिन गत वर्ष बारिश ने कहर बरपा दिया और अतिवृष्टि में मकान ढह गया। अब खुले में चूल्हा जल रहा है और तिरपाल के सहारे गर्मी के दिन-रात गुजारने पड़ रहे हैं। हालांकि, देवर को तो मस्जिद में आश्रय मिल गया, लेकिन मेरे सामने मुसीबतों का पहाड़ खड़ा हो गया है। कुछ ऐसी ही व्यथा पैलेस रोड मस्जिद गली निवासी जैतुन बानो की है। उन्होंने राजस्थान पत्रिका को बताया कि अतिवृष्टि के समय देवर का कमरा ढह गया और खुद का कमरा भी क्षतिग्रस्त हो गया। परिवार की आर्थिक स्थित ऐसी नहीं की मकान की मरम्मत कराईजा सके। वहीं दो बेटियों के निकाह भी करवाने हैं। इधर, अनवर खान का मकान ढहने के बाद बारिश के समय में कुछ दिन आस-पास के घरों में ठहरा, लेकिन अब इधर-उधर रहकर जीवन यापन कर रहा है।

अब फिर बारिश में सिर ढकने की चिंता
परिवार के सभी सदस्य दिनभर रजाइयों में रूई भरकर दो वक्त की रोटी का प्रबंध मुश्किल से करते हैं। ऐसे में जर्जर मकान को गिराकर फिर से बनाना मुश्किल हो रहा है। वहीं अब फिर से बारिश का मौसम आने वाला है। ऐसे में अब से ही इस परिवार को चिंता सताने लगी है।

सर्वे कर सहायता देना भूले
अतिवृष्टि में मकान ढहने के बाद प्रभावित परिवार की सूचना के बाद सम्बंधित अधिकारी-कर्मचारियों ने सर्वे किया। इसके साथ ही प्रभावित परिवार ने आवेदन पत्र भी नगर परिषद और तहसील कार्यालय में जमा करवाया, लेकिन अब तक सर्वे के अलावा कुछ नहीं मिला। परिवार के लोगों ने बताया कि सर्वे करने आए कर्मचारियों ने पासबुक, आधार तथा बीपीएल कार्ड भी लिए थे, लेकिन अब तक सहायता का इतंजार है।

बजट के बहाने टरका रहे अधिकारी
प्रभावित परिवार के सदस्य जब भी सहायता के लिए नगर परिषद या तहसील कार्यालय जाते हैं, तो वहां से एक ही जवाब मिलता है, कि आपदा मद में अब तक बजट ही नहीं आया है। ऐसे में थक हार कर परिवार के लोग घर की ओर लौट आते हैं।

इनका कहना है...
अतिवृष्टि में मकान ढहने के बाद प्रभावित परिवारों के आवेदन पत्र को सम्बंधित दस्तावेजों के साथ नगर परिषद, आपदा प्रबंधन एवं तहसील कार्यालय में जमा करवाया था। लेकिन पीडि़त परिवार को अब तक सहायता नहीं मिली। सहायता के लिए कई बार तीनों कार्यालयों के चक्कर लगाए हैं।
-मोहम्मद हनीफ शेख, सामाजिक कार्यकर्ता, सिरोही


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