
प्रतीकात्मक तस्वीर
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/सिरोही। राजस्थान में प्राध्यापक (स्कूल शिक्षा) के 10541 पदों पर शिक्षकों को पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नति वर्ष 2021-22 व 2022-23 की रिक्तियों के प्रति वरिष्ठता सह योग्यता के आधार पर की गई है। इसके बावजूद प्रदेश के कई नव क्रमोन्नत विद्यालयों में शिक्षकों की कमी पूरी होने को लेकर असमंजस है। कारण है। उन स्कूलों को क्रमोन्नत करने के बाद अभी तक पदों की स्वीकृति जारी नहीं करना।
राजस्थान में मार्च 2022 में 3834 विद्यालयों को माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत किया गया था। उसके बाद 1825 स्कूलों को उच्च प्राथमिक से सीधे उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत किया गया। इस प्रकार 2 सत्रों में करीब 5659 विद्यालयों को क्रमोन्नत किया गया। इन सभी क्रमोन्नत विद्यालयों में अभी तक भी व्याख्याता पद स्वीकृत नहीं किए गए है। ऐसे में पदोन्नति के बाद व्याख्याताओं की नियुक्ति उनमें नहीं की जा सकेगी। जिससे पद रिक्त के रिक्त रह जाएंगे।
क्रमोन्नत किए गए हर विद्यालय में करीब तीन प्राध्यापकों की जरूरत होती है। इस तरह प्रति 5659 विद्यालयों में करीब 16 हजार 977 प्राध्यापकों के पदों की स्वीकृति का इंतजार है। यदि पद स्वीकृति के बाद सभी पदोन्नत शिक्षकों को नियुक्त किया भी जाता है तो पद रिक्त रहेंगे।
प्रधाध्यापकों की पदोन्नति में 26 अभ्यर्थियों के चयन का निर्णय बंद लिफाफे में रखा है। इनमें कुछ निलम्बित और कुछ पर कार्रवाई होने से ऐसा किया गया है। वहीं 12 अभ्यर्थियों की प्रतिकूल प्रविष्टियों के कारण निर्णय नहीं किया जा सका। जबकि 102 को चयन के योग्य ही नहीं माना गया।
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पदोन्नत व्याख्याताओं को पदस्थापन से पूर्व क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वितीय स्वीकृति जारी की जानी चाहिए। उन स्कूलों में ही पदस्थापन किया जाना चाहिए। इन क्रमोन्नत विद्यालयों के विद्यार्थी पिछले 3 सत्र के बिना व्याख्याता के अध्ययन कर रहे है। यदि पदोन्नति में भी पदस्थापन इन स्कूलों में नहीं मिलता है तो हो सकता है आगे 2-3 सत्र तक व्याख्याता नहीं मिल पाएं।
बसंत कुमार ज्याणी, प्रदेश प्रवक्ता, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा
Updated on:
17 Dec 2024 03:14 pm
Published on:
17 Dec 2024 03:13 pm

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