
प्रतीकात्मक तस्वीर
सिरोही। बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ चलाए गए ‘बाल विवाह मुक्त सिरोही अभियान’ ने राज्य स्तर पर उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग, भारत सरकार की ओर से संचालित ‘बाल विवाह मुक्त अभियान’ के अंतर्गत सिरोही जिले को यह सम्मान मिला है। इस उपलब्धि के साथ चित्तौड़गढ़ दूसरे और डूंगरपुर तीसरे स्थान पर रहे हैं, जिससे सिरोही की पहल को प्रदेश में एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
यह सफलता जिला कलक्टर रोहताश्व सिंह तोमर के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण इकाई और बाल अधिकारिता विभाग के समन्वित प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। पिछले एक वर्ष से जिले में ‘बाल विवाह मुक्त सिरोही अभियान’ को योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। इस अभियान में सहयोगी संस्था एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन के साथ मिलकर व्यापक स्तर पर जनजागरूकता गतिविधियां चलाई गईं।
अभियान के तहत सिरोही के राजकीय और निजी विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और आमजन को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। लोगों को यह भी बताया गया कि यदि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका या 21 वर्ष से कम आयु के बालक के विवाह की सूचना मिले, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन 100 या 112, तथा आवा हेल्पलाइन 18001027222 पर सूचित करें।
जिला और ब्लॉक स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन कर संबंधित विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारियों से अवगत कराया गया। विशेष रूप से अक्षय तृतीया और पीपल पूर्णिमा जैसे अबूझ सावे के अवसर पर जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में जागरूकता रैलियां और अभियान चलाए गए।
इन लगातार प्रयासों का ही परिणाम है कि जिले में बाल विवाह के प्रति लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। प्रशासन का मानना है कि जागरूकता और सामूहिक भागीदारी से ही इस कुप्रथा को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है, और सिरोही इस दिशा में एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है।
Updated on:
30 Apr 2026 09:20 pm
Published on:
30 Apr 2026 09:20 pm
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