
सिरोही में पेड़ों पर बैठी चमगादड।
सिरोही. केरल में दहशत का नाम बने निपाह वायरस को लेकर जिले में भी जन जागरूकता की जरूरत महसूस की जा रही है। यह वायरस मुख्य तौर पर चमगादड़ और सुअरों के माध्यम से फैलता है। जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे के पास अभी तक इसके सम्बंध में कोई गाइड लाइन नहीं पहुंची है। हालांकि विभागीय निदेशालय ने निपाह से सम्बंधित साहित्य अवश्य यहां भिजवा दिया है। इसके अनुसार लोगों को निपाह के बारे में जानकारी देना जरूरी है। उल्लेखनीय है कि केरल में इस वायरस की चपेट में आने से अब तक 11 जनों की जान जा चुकी है। निपाह के अगले ठिकाने के तौर पर उत्तर प्रदेश का नाम लिया जा रहा है। राजस्थान में कई जिलों में चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग इसके सम्बंध में सक्रियता दर्शा रहे हैं।
गांवों में ***** ज्यादा
शहर समेत आस-पास में भी सुअरों का जंगलों से लेकर गली-मोहल्ले तक आना जाना रहता है। ग्रामीण क्षेत्र में भी सुअरों की तादात ज्यादा है। वन क्षेत्र में भी जंगली ***** खूब है। सुअरों के साथ-साथ शहर समेत आस-पास में के प्राचीन कोठारों सहित पुरानी इमारतों आदि में चमगादड़ें भी बड़ी संख्या में हैं। जिला मुख्यालय के सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय, कलक्ट्रेट समेत कई स्थानों पर चमगादड़ों की संख्या ज्यादा है।
बचाव के तरीके
मनुष्यों में, निपाह वायरस से बचाव ही उपचार है। रिबावायरिन नामक दवाई वायरस के खिलाफ प्रभावी साबित हुई है। हालांकि, रिबावायरिन की नैदानिक प्रभावकारिता मानव परीक्षणों में आज तक अनिश्चित है। इससे बचाव के उपायों के तहत गिरे हुए फल नहीं खाएं। जानवरों के खाए जाने के निशान हो तो ऐसी सब्जियां न खरीदें, जहां चमगादड़ अधिक रहते हो वहां खजूर खाने से परहेज करें और संक्रमित रोगी और जानवरों के पास न जाएं।
निपाह के लक्षण और उपचार
निपाह वायरस चमगादड़ के खाए फल और सब्जियों के जरिए फैलता है। यह वायरस एन्सेफ्लाइटिस का कारण बनता है। यह इंफेक्शन फू्रट बैट्स के जरिए लोगों में फैलता है। खजूर की खेती करने वाले लोग इस इंफेक्शन की चपेट में जल्दी आते हैं। इससे पीडि़त मनुष्य को इस इन्सेफ्लेटिक सिंड्रोम के रूप में तेज संक्रमण बुखार, सिरदर्द, मानसिक भ्रम, विचलन, कोमा के लक्षण नजर आते हैं। आखिर में मरीज की मौत तक हो जाती है।
Updated on:
28 May 2018 09:49 am
Published on:
28 May 2018 09:56 am
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