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सिरोही जिले के 20 गांव जहां 17 वर्ष में नहीं हुए चुनाव, जानें क्या है इसकी वजह

- गांव की अपनी संसद के उद्देश्य बनाए गए ग्रामदानी गांवों के प्रति सरकार की बेरूखी, सरकारें बदली लेकिन गांवों में नहीं करवाए चुनाव- ग्राम सभा के लिए कार्यपालिका समिति का नहीं हुआ गठन, राजस्व सम्बंधित विभिन्न कामकाज बाधित

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सिरोही जिले के 20 गांव जहां 17 वर्ष में नहीं हुए चुनाव, जानें क्या है इसकी वजह

सिरोही जिले के 20 गांव जहां 17 वर्ष में नहीं हुए चुनाव, जानें क्या है इसकी वजह

आबूरोड. गांव के अहम फैसले गांव की संसद में करने के लिए बनाए गए ग्रामदानी गांवों के प्रति सरकार की बेरूखी इन गांवों के विकास में बाधक बन चुकी है। ग्रामसभा में अध्यक्ष व कार्यपालिका समिति का कार्यकाल 3 वर्ष का होने के बावजूद 17 वर्ष बाद भी इन गांवों के चुनाव नहीं हुए हैं। ऐसे में इन गांवों का विकास भी ठप्प थे। गत माह जिला प्रशासन की ओर से इन गांवों में कार्यपालिका के दायित्वों के लिए प्रशासक नियुक्त करने के निर्देश दिए गए थे, हालांकि प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर कई ग्रामदानी गांवों के अध्यक्षों ने जिला कलक्टर से मुलाकात कर आपत्ति जताई थी। ऐसे में गांवों अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

संत विनोबा भावे की ओर से 1951 में चलाए गए भूदान आंदोलन में स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन किया गया था। जिसके बाद ग्रामदान का विचार राज्य में राजस्थान ग्रामदान अधिनियम-1971 के रूप में पारित हुआ। भूमि सम्बंधित विवाद भी ग्रामसभा के जरिए ही सुलझाए जाते हैं। जिले की बात करें तो 20 गांवों को ग्रामदानी गांव बनाया गया था। वर्ष-2005 में हुए ग्रामसभा चुनावों के बाद यहां चुनाव नहीं हुए। कार्यपालिका समिति का गठन नहीं होने से कई भूमि सम्बंधित विवादों के निपटारे समेत राजस्व सम्बंधित कामकाजों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से भी नियमित चुनाव नहीं करवाने से आमजन की सुविधा के लिए बने ग्रामदानी गांव आफत बन गए हैं। आबूरोड के ग्रामदानी गांवों की बात करें तो सरकार की उपेक्षा के चलते एक भी ग्रामदानी गांव में अब तक ग्रामसभा भवन भी नहीं बन सके हैं। ऐसे में खुले आसमान तले इन गांवों की ग्रामसभा होती है।

बाहर के लोग नहीं खरीद सकते इन गांवों में भूमि
ग्रामदानी गांवों में गांव के लोग अपनी व्यवस्था ग्रामसभा के माध्यम से सम्भालते हैं। गांव में राजस्व सम्बंधित कामकाज जैसे मोटेशन, रजिस्ट्री, वसूली, जमाबंदी, नकल जैसे कार्य ग्रामसभा की सहमति से ही होते हैं। ग्रामदानी गांवों की भूमि ग्राम सभा की होती है। यहां बाहरी लोग भूमि नहीं खरीद सकते हैं। जिले में सर्वाधिक आबूरोड व देलदर तहसील क्षेत्र में 12 ग्रामदानी गांव है। इसमें फोरेस्ट चोटिला, चोटिला, चोरवाव, चंडेला आम्बावेरी, पाबा, निचलाखेजड़ा, आम्बा, भैसासिंह, हाथल, खारा, असावा, अनादरा, टोकरा, अखापुरा खारल, तेलपीखेड़ा, वाड़ेली, कृष्णगंज, निचलीबोर, सबेलिया की फली, निचलागढ़ गांव ग्रामदानी गांव है।

इन्होंने बताया ...
ग्रामदानी गांवों की कार्यपालिका का कार्यकाल पूरा हो चुका है। जिन गांवों में पूर्व में प्रशासक लगाए गए थे, वहां ना तो चुनाव हुए और ना ही उन गांवों में कामकाज हो रहा है। गत दिनों जिला कलक्टर से मुलाकात कर ग्रामदानी गांवों में प्रशासक नियुक्त नहीं कर शीघ्र चुनाव करवाने की मांग की गई थी।
- लकमाराम गरासिया, अध्यक्ष, सबेलिया फली चंडेला, आबूरोड
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रेवदर क्षेत्र में ग्रामदानी गांवों में प्रशासक लगाए गए हैं। आबूरोड में अब तक प्रशासक नहीं लगाए गए हैं। जिला प्रशासन से गत दिनों ही ग्रामदानी गांवों के चुनाव करवाने की मांग की गई थी, ताकि गांवों में राजस्व सम्बंधित कामकाज सुचारू रूप से हो सके।
- गेनाराम गरासिया, अध्यक्ष, खारा, आबूरोड.
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ग्रामदानी गांवों में चुनाव को लेकर ग्रामदानी बोर्ड से अब तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं। प्रशासकों की नियुक्ति के लिए एक माह पूर्व जिला कलक्टर से निर्देश मिले थे। जिसकी पालना की गई है।
- दिनेशकुमार साहू, तहसीलदार, आबूरोड


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