
sirohi
आबूरोड।एक बस्ती जहां लोग जीते हैं नारकीय
जीवन। जी हां... यह दर्द नजर आ रहा है इस बस्ती में। यहां अभावों को टटोलने पहुंचे
तो उनकी आंखे भर आई। बस्ती की महिलाएं बोली, हमे कुछ मत दो। बस हमारे लिए स्नानाघर
और शौचालय बनवा दो।
वास्तव में कुछ बुनियादी सुविधाओं के अभाव में
बस्ती के वाशिंदों के लिए जीवन नारकीय बना हुआ है। दिन में पुरूष तो मजदूरी पर चले
जाते हैं, महिलाएं दिनभर घर ही रहती है। पास में रेलवे कॉलोनी से सटकर निकलते नाले
से उठती बदबू के बीच पूरा दिन गुजारना नागवार लगता है।
कई बार तो स्वस्थ
होने के बावजूद इस बदबू के कारण वे अपने-आपको बीमार सा महसूस करते हैं। पालिका ने
रोड तो बढिया बनवा दिया, पर नाले को न तो पक्का करवाया और न ही इसकी सफाई करवाई।
पार्षद से सैकड़ों बार गुहार लगा ली, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
सड़क किनारे
करती है स्नान
बस्ती की ही मंजूदेवी कंजर ने बताया कि उनके कच्चे
आशियानों में स्नान करने की सुविधा नहीं होने से बहन-बेटियों को भारी तकलीफ देखनी
पड़ती है। सड़क किनारे स्थित एक हैण्डपम्प की ओर इशारा करते हुए उसने बताया कि देखो
वह औरत जैसे हैण्डपम्प पर बैठकर नहा रही है न उसी तरह हम सभी को हैण्डपम्प पर बैठकर
खुले में स्नान करने को मजबूर होना पड़ता है।
नाले का पानी घरों
में
महिलाओं ने बताया कि तेज बारिश के दौरान तो इस नाले का पानी बाहर
निकलकर उनके घरों में घुस जाता है। घरों में गंदगी तो फैलती ही है, सामान तक को
बचाना मुश्किल हो जाता है। एक-दो दिन लगातार बारिश होने की स्थिति में तो घरों में
खाना बनाना भी दूभर हो जाता है। गांधीनगर में विकास के कार्य खूब हुए पर उनकी बस्ती
के वाशिंदों को बुनियादी सुविधाओं के तहत सिर्फ डामर सड़क मिली है।
मच्छर
यूं ही पनपते रहेंगे
नाला पक्का नहीं बनने तक मच्छर पनपते रहेंगे और
बच्चे बीमार पड़ते रहेंगे। पालिका ने नालियां भी बनवाई है पर उनका ढलान ठीक ढंग से
नहीं दिया होने के कारण गंदा पानी वापस घरों की ओर आता है।सफाईकर्मी कभी कभार आते
होने से अक्सर गंदगी फैली रहती है।
सिर्फ शौचालय बन जाए
बस्ती
में चंद्रादेवी समेत कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए।सिर्फ सार्वजनिक
शौचालय चाहिए। हमारी जवान-बहू बेटियां शौच के लिए इस नाले में उतरती है।पांव गंदे
हो जाते है।गंदे पानी से उठती बदबू के कारण मुंह व नाक ढंककर बैठना पड़ता है।और तो
और बहू-बेटियां देर-सबेर नाले में शौच के लिए बैठती हैं तो राह चलते शरारती तत्व
पत्थर मारते हैं। बड़ी शर्मीन्दगी महसूस होती है। पर क्या करें। हमारे घरों में
शौचालय नहीं होने से इधर-उधर बैठने की मजबूरी हो जाती है।
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