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आबूरोड : रेलवे कर्मियों ने काली पट्टी धारण कर की ड्यूटी

नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन के बैनर तले रेलवेकर्मियों ने सोमवार को 'काला दिवस' मनाते हुए काली पट्टी धारण कर ड्यूटी की।

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Rajendra Singh Denok

Feb 07, 2017

आबूरोड : रेलवे कर्मियों ने काली पट्टी धारण कर की ड्यूटी

आबूरोड : रेलवे कर्मियों ने काली पट्टी धारण कर की ड्यूटी

नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन के बैनर तले रेलवेकर्मियों ने सोमवार को 'काला दिवस' मनाते हुए काली पट्टी धारण कर ड्यूटी की। साथ ही रेलवे मंत्रालय व बोर्ड के उस आदेश की कड़े शब्दों में भत्र्सना की, जिसमें कहा गया है कि संरक्षा कोटि ग्रेड वेतन 4200 व उससे अधिक के पर्यवेक्षक पर्यवेक्षक 31 मार्च के बाद किसी कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी नहीं बन सकेंगे। कार्मिकों ने आदेश पर आक्रोश जताते हुए कहा कि इससे कार्मिकों में भारी असंतोष व्याप्त है।
केन्द्रीय लोको पायलट व गार्ड्स लॉबी के आगे रेल कर्मियों ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बोर्ड के मेम्बर सदस्य प्रदीपकुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहां से जुलूस की शक्ल में रेलवे स्टेशन के बाहर परिसर में पहुंचे और आदेश की प्रतियों को जलाकर विरोध-प्रदर्शन किया। यूनियन सचिव समदरसिंह राठौड़ ने इस आदेश को गैरसंवैधानिक करार देकर कहा कि रेलवे बोर्ड को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। कोई भी रेल कर्मचारी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के राइट-टू-ऑर्गेनाइजेशन की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत श्रमिक संगठन की कार्यकारिणी का सदस्य बन सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संरक्षा के नाम पर रेल कर्मचारियों को प्रताडि़त करने व उनके अधिकारों को ऐसे आदेश जारी कर छीनने के केन्द्र सरकार की ओर से निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। राजनीतिक स्वार्थ सिद्धी के चलते उन्होंने रेलवे का निरन्तर दोहन किया। आर्थिक रूप से ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दी कि खराब रेल लाइन, पुराने कोच, पुराने रेलवे पुल के नवीनीकरण की तुरंत आवश्यकता होने के बावजूद रेलवे के पास धन उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में रेलवे लाइन करीब ढाई सौ प्रतिशत परिवहन भार वहन कर रही है, जिस कारण इनका रखरखाव भी ढंग से नहीं हो पा रहा है। नतीजतन दुर्घटनाएं हो रही है। अराजक तत्व व नक्सली रेलवे लाइनों को नुकसान पहुंचाकर रेल हादसों का कारण बन रहे हैं। रेल मंत्रालय अपनी गलतियों को छुपाकर सारा दोष रेल कर्मचारियों के सिर पर मढऩे का कार्य सुनियोजित रूप से कर रहा है। जबकि सच यह है कि रेल कर्मचारी पूरी लगन व निष्ठा के साथ विपरीत परिस्थितियों में भी दिन-रात कार्य कर रहे हैं। विरोध-प्रदर्शन में देवेन्द्र शर्मा, हितेश शर्मा, शिशुपाल, शैलेन्द्र कुमावत, मांगूसिंह रावत, हणवन्तसिंह, शंकरलाल, नरपतसिंह, प्रदीप शर्मा, ललित शर्मा, अनिलकुमार, अजट भट्ट, संजय सक्सेना, अनिरुद्धसिंह राठौड़, कृष्ण शर्मा, भानसिंह चौहान, प्यारेलाल चौहान, रविन्द्रसिंह, रवि शर्मा, ललित शर्मा समेत कई कर्मचारी शामिल थे।

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