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गांवों में ढूंढ़ोत्सव की धूम, बाजार में बढ़ी रौनक

मंडार. होली पर्व नजदीक आते ही गांवों में ढूंढ़ोत्सव की धूम मची हुई है। ऐसे में बाजार भी रौनक बढ़ गई है। साथ ही ग्रामीण अंचल में चंग की थाप पर परम्परागत फागण गीतों की गंूज सुनाई देने लगी है।

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sirohi

गांवों में ढूंढ़ोत्सव की धूम, बाजार में बढ़ी रौनक

मंडार. होली पर्व नजदीक आते ही गांवों में ढूंढ़ोत्सव की धूम मची हुई है। ऐसे में बाजार भी रौनक बढ़ गई है। साथ ही ग्रामीण अंचल में चंग की थाप पर परम्परागत फागण गीतों की गंूज सुनाई देने लगी है। बाजार में कपड़ा, मणिहारी, बर्तन, सौन्दर्य प्रसाधन, रेडिमेड, सोने-चांदी व किराणा की दुकानों पर चहल-पहल नजर आने लगी है। नवजात शिशुओं की ढूंढ व नव-विवाहितों की जैती को लेकर लोगों में उत्साह बना हुआ है। लोगों ने अपने परिवार व सगे-सम्बंधियों के यहां होने वाले ढूंढोत्सव व जैती को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। आज भी गांवों में नवजात शिशुओं को होलिका दहन के बाद ढूंढ़ की रस्म अदा होती है। दहन के दौरान उडऩे वाली ध्वजा से आने वाले साल का भविष्य भी देखते हैं। परिवार व मोहल्ले के लोग हाथों में लकड़ी (डिडोरी) को रंगने का काम शुरू होता है। आज भी गांवों में ग्रामीण रंगों से रंगी लकड़ी डिडोरी से गैर नृत्य करते हैं। जो सात दिनों तक क्रम चलता है। होली के दूसरे दिन सवेरे नवजात शिशुओं को ढोल के ढमाकों के साथ नए परिधानों में सजाकर होली चौक जाकर राख का तिलक करवाकर फेरे लगवाते हैं। लोग एक दूसरे पर रंग डालते हैं और शाम को नव-विवाहित जोड़े होली दहन स्थल पर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं। जिसे जैती कहते हैं। कपड़ा व्यवसायी अजाराम चौधरी व रमेश कुमार रावल ने बताया लोगों में अब कपड़ा खरीदारी को लेकर उत्साह बढ़ा है।