
फर्जीवाड़े से लिए ठेके की एसीबी में जांच शुरू हुई तो ठेकेदार इस कार्य से हाथ झटकने की फिराक में है। पीडब्ल्यूडी ने पहले ही वर्क ऑर्डर पर रोक लगा रखी है। अब ठेकेदार खुद इसे सरेंडर कर रहा है। उसने सरेंडर की अर्जी तक लगा दी है। इसमें कहा कि काम करने में असमर्थ होने से वह ठेका सरेंडर कर रहा है। माना जा रहा है कि ठेकेदार शायद इसमें बचाव का कोई पक्ष ढूंढ रहा है। मै. एजी कंस्ट्रक्शन नाम की इस फर्म ने आबूरोड में जनजाति भवन के लिए टेंडर भरा था। इसमें 17.25 प्रतिशत की कम दरें लगाई है। इससे एक करोड़ 5 लाख रुपए की लागत मानी जा रही है। टेंडर होने के बाद ठेकेदार को सितम्बर के प्रथम सप्ताह में वर्क ऑर्डर जारी किया गया, लेकिन एसीबी की जांच शुरू होने पर विभाग ने वर्क ऑर्डर पर रोक लगा दी। अब ठेकेदार ने इसे सरेंडर करने की अर्जी लगाई है, विभाग ने यह अर्जी कार्यवाही के लिए मुख्य अभियंता को भेजी है।
हो सकता है ब्लैक लिस्टेड
अधिकारी बताते हैं कि एनआरएचएम के एक्सईएन ने फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र जारी किया था। इसकी जांच हो रही है। दोषी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। इसके तहत फर्म को ब्लैक लिस्टेड तक किया जा सकता है।
अधूरे कार्य का पूर्णता प्रमाण पत्र
पीडब्ल्यूडी ने जनजाति भवन के लिए टेंडर निकाला, जिसमें पात्र ठेकेदार के लिए न्यूनतम क्यूबिक फीट के कार्य का अनुभव मांगा गया। आबूरोड निवासी ठेकेदार अमृत अग्रवाल ने कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के साथ पीडब्ल्यूडी में आवेदन कर ठेका ले लिया। शिकायत के आधार पर एसीबी ने जांच शुरू की तो पता चला कि यहां निर्माण चल रहा है। प्रथम दृष्टया जांच में यही सामने आया कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के इंजीनियर ने ठेकेदार को गलत तरीके से प्रमाण पत्र जारी कर दिया, इस आधार पर पीडब्ल्यूडी में भी टेंडर ले लिया। इस मामले से एनआरएचएम के अधिकारी भी संदेह के घेरे में हैं। ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।
जांच चल रही है...
मामले में जांच चल रही है। पता चला है कि ठेकेदार खुद ही पीडब्ल्यूडी में लिया ठेका छोडऩे की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे जांच पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले में सम्बंधित विभागों को भी कार्यवाही के लिए लिखा जाएगा।
नारायणसिंह राजपुरोहित, एएसपी, एसीबी, सिरोही
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