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आखिर कहां गए उद्धव गुट के पार्षद? शिंदे सेना को चाहिए 4 और चार ही कॉरपोरेटर्स गायब…समझिए पूरा खेला

Maharashtra: निकाय चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। मेयर पद की खींचतान के बीच उद्धव गुट के कल्याण-डोंबिवली के चार पार्षद पिछले 10 दिनों से लापता हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

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पुणे

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Imran Ansari

Jan 27, 2026

Eknath Shinde suspicion 4 councillors Uddhav faction in Maharashtra

Maharashtra:महाराष्ट्र में हुए निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद पूरे राज्य में सियासी पारा हाई है, और मेयर बनाने के लिए सभी पार्टियों में खींचातानी का माहौल बना हुआ है। इसी बीच उद्धव गुट के उन चार पार्षदों की चर्चा जोरों से हो रही है, जो पिछले 10 दिन से गायब हैं और उनका अभी तक पता नहीं चला है। बता दें कि गायब सभी पार्षद कल्याण और डोंबिवली के ही हैं। अब इन पार्षदों के गायब होने के पीछे का सियासी समीकरण समझिए।

आपको बता दें कि पूरे निकाय चुनाव में राजनीतिक पार्टियों के द्वारा सबसे ज्यादा सियासी पैतरें कल्याण डोंबिवली में आजमाए जा रहे हैं क्योंकि यहां पर नगर निगम चुनाव में जनता ने महायुति को बहुमत दिया है। कल्याण डोंबिवली नगर निगम में कुल 122 सीटें हैं, जिनमें एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिव सेना ने 53 सीटें जीती हैं। वहीं, यहां पर भाजपा के खाते में 50 सीटें गईं हैं। शिवसेना (यूबीटी) को केवल 11 सीटों पर जीत मिली, जबकि मनसे ने 5, कांग्रेस ने 2 और राकांपा (एसपी) ने 1 सीट हासिल की। मनसे ने अपनी पांच सीटों के साथ शिंदे सेना से हाथ मिला ली है, जिसके बाद शिंदे सेना की सीटें 58 हो गई हैं। अब उसको बहुमत में आने के लिए केवल 4 सीटों की आवश्यकता है और इसी नगर निगम के उद्धव गुट से चार पार्षद गायब हैं।

उद्धव गुट ने दर्ज कराई शिकायत

16 जनवरी के बाद भी जब उद्धव गुट के चार पार्षदों का पता नहीं चला तो बीते शुक्रवार को शिव शिवसेना (UBT) कल्याण जिला प्रमुख शरद शिवराज पाटिल ने कोलसेवाडी पुलिस से संपर्क कर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी। पाटिल ने अपनी शिकायत में कहा कि दो कॉरपोरेटरों के मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं और उनका अचानक लापता होना केवल निजी सुरक्षा का सवाल नहीं है। उनके मुताबिक यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून-व्यवस्था और जनता के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।

गायब पार्षदों से खफा यूबीटी

पार्षदों के गायब होने के बाद यूबीटी नेताओं का कहना है कि ये कॉरपोरेटर जनता को जवाब देने से बच रहे हैं। नेताओं का कहना है कि जनता ने उन्हें वोट दिया है और जनता के साथ धोखा करना ठीक नहीं है। उन्हें जनता के सामने आकर उनके सवालों के जवाब देने चाहिए। 10 दिन बाद भी जब लापता पार्षद सामने नहीं आए, तो यूबीटी नेताओं ने उनकी गुमशुदगी के पोस्टर चिपका दिए।

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