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सिरोही का एक गांव ऐसा, जहां घर-घर में गाय और भैंस

मंडार के पिथापुरा (एम.) में सर्वाधिक पैतालीस सौ दुधारू गाय- भैंसगांव में 6 हजार लीटर से अधिक होता है दुग्ध का उत्पादन

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सिरोही का एक गांव ऐसा, जहां घर-घर में गाय और भैंस

सिरोही का एक गांव ऐसा, जहां घर-घर में गाय और भैंस

रणजीतसिंह परिहार
मंडार (सिरोही)। रेवदर ब्लॉक में पिथापुरा (एम.) एक ऐसा गांव है जहां घर-घर दुधारू गाय-भैंस हैं। पशु-पालन व्यवसाय से जुड़े ग्रामीण काश्तकार न सिर्फ गाय-भैंस के दूध, दही व घी का सेवन करते हैं वरन् अपनी आजीविका चलाने के लिए दूध और घी बेचकर अच्छी खासी कमाई भी करते है। इस कमाई से उन्हें जोरदार आर्थिक सम्बल मिल रहा है। अधिकतर दूध डेयरियों में भरवाते हैं, जिससे उनको फेट के मुताबिक अच्छी रेट मिल जाती है।

मंडार उप तहसील क्षेत्र में पशुपालकों के पास सर्वाधिक दुधारू व गर्भवती भैंस तथा शंकर व देशी गायें हैं। जिनसे रोजाना हजारों लीटर दूध का उत्पादन होता है। यह दूध विभिन्न डेयरियों के माध्यम से गुजरात भेजा जा रहा है। डेयरी में दूध भरवाने से अच्छी खासी कमाई होने से उनकी आर्थिक स्थिति काफी सु²ढ़ हुई है। अधिकतर पशुपालकों के घर आधुनिक सुविधाओं से सम्पन्न है और शायद ही ऐसा कोई घर होगा, जिसमें टू व्हीलर या फोर व्हीलर वाहन नहीं होगा। शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जिसका एकाध बच्चा या बच्ची उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर रहे हो। कल मिलाकर पशुपालन के व्यवसाय ने उन्हें स्वावलम्बी बनाने के साथ आर्थिक दृष्टि से भी खासा सम्पन्न बनाया है।

पशु पालकों का शंकर गायों के प्रति बढ़ा रुझान
क्षेत्र के पशुपालकों का रुझान दिन-ब-दिन शंकर नस्ल की गायों के प्रति बढऩे लगा है। शंकर गाय अधिक दूध देती है। वैसे क्वॉलिटी तथा फैट में बहुत कमजोर होता है। वैसे गाय व भैंस का दूध मिलाने पर फैट अनुमानित मांग के अनुसार करीब-करीब बैठ जाता है। दूध उत्पादन ने पशुपालकों को आर्थिक रूप से सु²ढ़ बनाया है। क्षेत्र में सर्वाधिक पिथापुरा में दुधारू 3877 भैंस हैं। पशु चिकित्सकों व पशु गणना के आंकड़ों के मुताबिक पिथापुरा में सर्वाधिक दुधारू भैंस हैं। जिससे सर्वाधिक दुग्ध का उत्पादन होता है। गायों की कमी के कारण गाय का देशी घी हजार से दो हजार रुपए प्रति लीटर बिक जाता है। हालांकि, पशुपालक घी बनाने की बजाय दूध डेयरी में भरवाने को ज्यादा फायदे का सौदा मानते हैं।

दूध भेजा जा रहा है गुजरात
मंडार के पशु चिकित्सक डॉ. सुनील जानी व सोरड़ा के पशु चिकित्सक डॉ. हबीब खान के अनुसार मंडार, बड़ेची, दानपुरा, गुंदवाड़ा, जावल, मगरीवाड़ा, सोनेला, पिथापुरा एम. में क्रमश: दुधारू व गर्भवती गायें 653, 285, 50, 302, 166, 271, 64, 623 तथा भैंस 2605, 273, 958, 851, 1007, 1152, 390, 3877 हैं। सोरड़ा में गायें करीब 300, जबकि भैंस 1650 हैं। गायों में देशी नस्ल की गायों की बजाय शंकर नस्ल की गायें करीब अस्सी फीसद हैं। दूध उत्पादक डेयरी में दूध भरवाने के लिए गाय व भैंस का दूध अलग-अलग पात्रों में ले जाते हैं। हालांकि, डेयरी संचालक फेट की मात्रा निकालने के बाद गाय व भैंस का दूध मिला लेते हैं। सारा गुजरात की बड़ी डेयरियों में टैंकरों के जरिए
पहुंचता है।

डेयरियों में भरवा रहे हैं छह हजार लीटर दूध

मवेशियों को वे पोष्टिक आहार, हरा चारा व मूंगफली की पत्तियां खिलाते हैं, ताकि दूध की मात्रा लगातार बढ़ती रहें। गुजरात के दर्जनों तथाकथित चिकित्सक मंडार क्षेत्र में पशुओं का उपचार कर मोटी कर रहे हैं। पिथापुरा में साढ़े चार हजार दुधारू मवेशी होने से करीब छह हजार लीटर से अधिक दूध का उत्पादन हो रहा है और यह सारा दूध अलग-अलग डेयरियों में भरवाया जा रहा है।

इन्होंने बताया...
गांव में कलबी तथा रेबारी समुदाय के अधिक पशुपालक हैं, जो सर्वाधिक पशुपालन के साथ दूध उत्पादन करते हैं। गांव में चार हजार दुधारू भैंस हैं। देशी गायें दूध कम देने से शंकर गायों के प्रति रुझान बढ़ा है। - नानजी राम देवासी,
पूर्व सरपंच, पिथापुरा एम.