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सिर्फ विधवाएं करती हैं इन मां की पूजा, शिव को निगल चुकी हैं मां

नैमिष के कालीपीठ में स्थित मंदिर और सीतापुर के विजय लक्ष्मी नगर में शनिदेव के प्रसिद्ध मंदिर में मां धूमावती के दर्शन वासंतिक नवरात्र पर शनिवार को ही होते हैं।

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Sujeet Verma

Apr 09, 2016

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सीतापुर.इन देवी मां की पूजा सिर्फ विधवाएं करती हैं और मां के दर्शन साल में नवरात्रों के शनिवार को ही होते हैं। यही नहीं इन देवी मां ने भगवान शंकर को निगल लिया था। सीतापुर के दो अलग-अलग स्थानों पर लगता है, नवरात्र में पड़ने वाले शनिवार पर लोगों का हुजूम और लोग करते हैं दर्शन।

नैमिष के कालीपीठ में स्थित मंदिर और सीतापुर के विजय लक्ष्मी नगर में शनिदेव के प्रसिद्ध मंदिर में मां धूमावती के दर्शन वासंतिक नवरात्र पर शनिवार को ही होते हैं। ललिता देवी के पुजारी व कालीपीठ के संस्थापक जगदम्बा चार्य ने बताया कि माँ धूमावती के दर्शन करने का प्रावधान नवरात्र में सिर्फ शनिवार के दिन का ही है और इस बार वासंतिक नवरात्र में 9 अप्रैल का दिन ही ऐसा पड़ रहा है, जब मां धूमावती के दर्शन होंगे।

उन्होंने बताया कि 10 महाविधाओं में उग्र मां धूमावती का स्वरूप विधवा का है और कौआ उनका वाहन है। माता श्वेत वस्त्र धारण किये हुए हैं और उनके केश खुले हुए हैं, जो उनके रूप के उग्र दिखाता है। शनिवार को काले कपड़े में काले तिल माता को भेंट किये जाते हैं। परम्परा के अनुसार सुहागिन माताएं मां धूमावती की पूजा नहीं करती हैं, लेकिन अपने सुहाग की रक्षा के लिए दूर से मां धूमावती के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
उन्होंने मां धूमावती के उग्र रूप के बारे में बताया कि एक बार मां धूमावती अपनी क्षुधा शांत करने के लिए भगवान शंकर के पास गयीं, उस वक्त भगवान शंकर समाधि में थे और मां के बार-बार निवेदन करने पर भी वो अपनी समाधि से नहीं उठे और उन पर ध्यान नहीं दिया। जिसपर मां ने जोर-जोर से लंबी अंदर की सांस ली और भगवान शंकर को निगल लिया। भगवान शंकर के गले में विष होने के कारण मां के शरीर से धुँआ निकलने लगा। इस कारण माँ का शरीर विकृत और श्रृंगार विहीन हो गया और उनका नाम मां धूमावती पड़ा।

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