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गन्ना किसानों का 73 फीसदी भुगतान कर इस जिले ने बनाया रिकार्ड, यूपी में दूसरे स्थान पर पहुंचा

जिले में स्थापित चीनी मिलों ने किसानों का गन्ना भुगतान कर उत्तर प्रदेश में कीर्तिमान स्थापित कर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है।

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गन्ना किसानों का 73 फीसदी भुगतान कर इस जिले ने बनाया रिकार्ड, यूपी में दूसरे स्थान पर पहुंचा

गन्ना किसानों का 73 फीसदी भुगतान कर इस जिले ने बनाया रिकार्ड, यूपी में दूसरे स्थान पर पहुंचा

सीतापुर. जिले में स्थापित चीनी मिलों ने किसानों का गन्ना भुगतान कर उत्तर प्रदेश में कीर्तिमान स्थापित कर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया हैं। चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का 72 फीसदी गन्ना मूल्य भुगतान कर दिया हैं। वहीं सहकारी क्षेत्र की स्थापित एक मात्रा चीनी मिल जिले में सबसे फिसड्डी साबित होती नजर आ रही हैं इस चीनी मिल ने किसानों का अब तक महज 57 फीसदी ही भुगतान किया हैं। गन्ना किसानों का समय पर भुगतान होने से गन्ना किसान काफी उत्साहित हैं।

सीतापुर में स्थापित हैं 5 चीनी मिलें

सीतापुर जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में कुल पांच चीनी मिलें कार्यशील हैं। जिसमे पहली डालमिया शुगर मिला रामगढ़,दूसरी सेक्सरिया शुगर फैक्ट्री बिसवां,तीसरी अवध शुगर मिल हरगांव,चौथी डालमिया शुगर मिल जवाहरपुर और पांचवी सहकारी चीनी मिल महमूदाबाद स्थापित हैं। इन चीनी मिलों में सीतापुर और आस-पास के क्षेत्रों का गन्ना पेराई सत्र में पेराई का कार्य किया था। सीतापुर का अधिकांश हिस्सा खेती योग्य होने के चलते किसान गन्ने की तरफ काफी आकर्षित होते हैं और अधिकांश मात्रा में यहां गन्ना बोआई का कार्य होता हैं। गन्ना अधिकारी के मुताबिक सीतापुर की अधिकांश बेल्ट गन्ना उत्पादन के लिए ही प्रसिद्ध हैं इसलिए यहां का किसान गन्ना अधिक बोआई करता हैं।

73 फीसदी किया गन्ना किसानों का भुगतान

जिला गन्ना अधिकारी के मुताबिक इस पेराई सत्र में कुल 5 चीनी मिलों ने 5 करोड़ 80 लाख 53 हजार कुंतल गन्ने की कुल पेराई की थी। गन्ना अधिकारी के मुताबिक इस पेराई सत्र का कुल 1863.18 करोड़ रुपया गन्ना किसानों को भुगतान दिया जाना था। जिसके सापेक्ष में चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का महज 1361.39 करोड़ रुपये का भुगतान ही किया। सभी चीनी मिलों को मिलाकर 73 फीसदी ही गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिलों द्वारा किया जा चुका हैं। गन्ना अधिकारी के मुताबिक नकदी फसल यानी कि क्रैश क्रॉप होने के कारण किसान इसकी पैदावार को ज्यादा मुनीफ़ मानते हैं लिहाजा गन्ने की सफल इस जिले की मुख्य फसल बन गयी हैं।