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इलाज के बदले में दुआ के बदले में मिल रही हैं बद्दुआएं

नालंदा के पावापुरी मेडिकल कॉलेज ( Medical college ) के चिकित्साकर्मियों को नई तरह की परेशानी से जूझना पड़ रहा है। परेशानी भी अजीब है। इलाज करने के बदले में दुआएं मिलने के बजाए ( Medical sfaff facing absued ) बद्दुआएं मिल रही हैं। यह मामला है अस्पताल में भर्ती चार धर्म प्रचारकों का।

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इलाज के बदले में दुआ के बदले में मिल रही हैं बद्दुआएं

इलाज के बदले में दुआ के बदले में मिल रही हैं बद्दुआएं

नालंदा(बिहार): पावापुरी मेडिकल कॉलेज ( Medical college ) के चिकित्साकर्मियों को नई तरह की परेशानी से जूझना पड़ रहा है। परेशानी भी अजीब है। इलाज करने के बदले में दुआएं मिलने के बजाए ( Medical sfaff facing absued ) बद्दुआएं मिल रही हैं। इतना ही नहीं इलाज के लिए आए मरीज चिकित्साकर्मियों को भर्ती करने पर कोस ही नहीं रहे बल्कि जांच में भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। मरीज के बजाए किसी मेहमान की तरह नाज-नखरे अलग से दिखा रहे हैं।

मस्जिद में मिले थे धर्म प्रचारक
यह मामला है अस्पताल में भर्ती शेखपुरा के ( 4 preacher are non cooperating ) अहियापुर मस्जिद में मिले चार धर्म प्रचारकों का। इनकी इन हरकतों की वजह से इलाज करने वाले चिकित्सक एवं नर्सिंगकर्मी त्रस्त हैं। शेखपुरा पुलिस को अहियारपुर क्षेत्र स्थित मस्जिद में कुछ लोगों के छिपे होने की सूचना मिली। दिल्ली के निजामुद््दीन की तबलीगी जमात के संदिग्धों का मामला संवेदनशील होने के कारण पुलिस सूचना मिलते ही मस्जिद जा पहुंची। पुलिस को मौके पर चार लोग मिले। पूछताछ के दौरान उन्होंने पुलिस को बताया कि वे धर्म प्रचार के सिलसिले में यहां आए हुए हैं।

अस्पताल को खाला का घर समझा
पुलिस की तस्दीक में यह बात साफ हो गई कि चारों लोगों का संबंध तबलीगी जमात में शामिल हुए लोगों से नहीं है। पुलिस को मिली सूची से मिलान करने के बाद यह तस्दीक हुई है। पुलिस ने बड़ी मुश्किलों से इन चारों को साथ ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराया। जबरन भर्ती कराने से खफा इन चारों ने अस्पताल में तमाशा शुरु कर दिया। चारों चिकित्सकों और अन्य स्टॉफ से दुव्र्यवहार पर उतर आए। इतना ही नहीं फरमाईशों की झड़ी लगा दी। फिलहाल चिकित्साकर्मियों को इनके उपचार में पापड़ बेलने पड़ रहे हैं। बड़ी मुश्किलो से एक का सैम्पल लेकर जांच को भेजा गया है। अन्य तीनों में कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं। किसी दूसरी बीमारी का मामला होता तो चिकित्साकर्मी भी इनको चलता करते, किन्तु मामला कोरोना से जुड़ा होने के कारण इन्हें बर्दाश्त करना मजबूरी बनी हुई है।