. वर्ष 2012 में परिसीमन के दौरान अस्तित्व में आयी ओबरा विधानसभा सीट पर बसपा के भरोसेमंद कैलाशनाथ यादव ने अपनी बिसात बिछाई। उन्होंने सभी विरोधियो को पस्त करते हुए अपने पुत्र सुनील सिंह यादव के सिर जीत का सेहरा बांधकर अपनी काबिलियत साबित की। बता दें कि अस्तित्व में आने से पहले ओबरा विधानसभा का अधिकांश हिस्सा पहले दुद्धी सीट में आता था, जहां आदिवासी नेता विजयसिंह गोंड का प्रभाव रहता है।