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इसी विजयगढ़ किले की प्रेम कहानी पर बना था टीवी सीरियल चंद्रकांता, आज भी छिपा है खजाना, अब ऐसा दिखता है

सरकारी मशीनरी के उपेक्षा से जर्जर हालत में है किला, यहां उर्स का लगता है मेला...  

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इसी विजयगढ़ किले की प्रेम कहानी पर बना था टीवी सीरियल चंद्रकांता, आज भी छिपा है खजाना, अब ऐसा दिखता है

जितेंद्र गुप्ता

सोनभद्र. टीवी सीरियल धारावाहिक चंद्रकांता ने खूब धूम मचाई। चंद्रकांता में विजयगढ़, चुनारगढ़ और नौगढ़ का जिक्र है जो दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया है। सीरियल में दर्शित विजयगढ़ किला जनपद सोनभद्र में स्थित है। जहां किले का हालात बद बदतर हो गया है। अधिकारीयों के उदासीन रवैये से किले की स्थिति जर्जर अवस्था में पहुंच गया है।

जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर स्थित जमीन से लगभग 5 सौ मीटर ऊंचाई पर बना विजयगढ़ दुर्ग सीरियल चंद्रकांता की अमर प्रेम कहानी के रूप में जाना जाता है। नौगढ़ के युवराज और चंद्रकांता संग उसकी प्रेम कहानी को लेकर बना टीवी सीरियल चंद्रकांता प्रसारित हुआ था, जो काफी सराहा गया। लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह चर्चित जगह खंडहर बनकर रह गया है। सत्ता में आयीं सूबे व केंद्र की सरकारों ने इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले दिनों में यह तिलिस्मी किला महज इतिहास बनकर रह जाएगा।

वर्तमान में गौर करें तो विजयगढ़ किले का नाम मात्र ही बचा हैं इसकी पहचान अब सिर्फ मीरान शाह बाबा की मजार और राम-सीता सरोवर के नाते बची है। बता दें कि 1 अप्रैल से लगने वाले उर्स के मेले में हिन्दू और मुस्लिम की आस्था का केंद्र रहे ये मिरान शाह बाबा पर चादर चढ़ाने दोनों ही समुदाय के लोग आते रहे है

करीब 1040वीं सदी में राजा चेत सिंह का बनवाया गया विजयगढ़ दुर्ग तिलिस्मी है। दावा किया गया है कि, चंद्रकांता धारावाहिक से ख्याति प्राप्त कर चुके इस तिलिस्मी दुर्ग की खासियत है कि, किले के अंदर से गुफा के जरिए नौगढ़ और चुनार गढ़ किले के लिए रास्ता है। यह रास्ता तिलस्म से ही खुलता है। किले का खजाना भी इन्हीं गुफाओं में छिपे होने की संभावना अक्सर लोगों द्वारा जताई जाती है। दुर्ग के ऊपर बने छोटे-बड़े सात तालाब हैं। इनमें रामसरोवर तालाब और सीता तालाब में कभी पानी सूखता यह भी एक सच्चाई है।

पुराने लोग कहते हैं कि, पहले यहां लोग घूमने आते थे तो तालाब से बर्तन निकलता था। खाना खाने के बाद उसे धोकर लोग उसी तालाब में छोड़ देते थे। किले के पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार है, जो धराशायी हो रहा है। इसकी दीवारें गिर रही हैं। स्थानीयों का कहना है कि जिस तरह से दीवारों का ढहना जारी है उससे कुछ दिनों में इनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

जिला प्रशासन ने किले के अस्तित्व को जिंदा रखने के लिए कोई कार्य नहीं किया वरना किले की स्थिति ऐसी न होती। वहीं नये जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह से लोगों को बहुत अपेक्षाएं हैं। पर्यटन विभाग ने कुछ कार्य कराया है।