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(चंडीगढ): मेडल विजेता खिलाडियों को नौकरी देने के लिए हरियाणा सरकार की नई नीति फिलहाल विवाह के मुद्दे पर अटक गई है। मसला तब पैदा हुआ जबकि नीति के मसौदे को स्वीकृति के लिए लीगल रिमांमब्रांस को भेजा गया। लीगल रिमांमब्रांस ने इस नीति में एक प्रावधान यह जोड दिया कि ऐसे खिलाडी को नौकरी न दी जाए जो कि ऐसे व्यक्ति से वैवाहिक रिश्ते जोडता है जिसका वैवाहिक साथी पहले से मौजूद है या जो अपना वैवाहिक साथी मौजूद होते हुए किसी अन्य व्यक्ति से वैवाहिक सम्बन्ध बनाता है। इस प्रावधान से मुक्ति का फैसला राज्य सरकार इस आधार पर कर सकती है कि पर्सनल लाॅ इस तरह के वैवाहिक रिश्ते की अनुमति देता है।
लीगल रिमांमब्रास द्वारा इस तरह का प्रावधान जोडे जाने पर खेल विभाग के प्रधान सचिव अशोक खेमका ने आपत्ति व्यक्त कर दी। खेमका ने अपने नोट में कहा है कि नए सेवा नियमों में इस तरह की शर्त जोडा जाना उचित नहीं है। भले ही यह अवैध न हो लेकिन अनैतिक और महिला विरोधी है। बहुविवाह स्वयं में सामाजिक रूप से स्वीकार्य नैतिक मूल्यों के खिलाफ है। एक विवाह समूची दुनिया का स्थापित मूल्य है। संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत महिलाओं को लैंगिक न्याय मुहैया कराने के प्रयासों से इसे धक्का लगेगा। खेमका ने इस प्रावधान को आधुनिक समय में पुरातन बताया है। इससे पहले लीगल रिमांमब्रांस ने आरक्षण और मानक शिक्षा से सम्बन्धित नियम 5 ओर 8 पर आपत्ति की थी।
यह नीति ओलम्पिक,एशियाई खेल,राष्ट्रकुल खेल, विश्व चैम्पियनशिप और अन्य खेल स्पर्द्धाओं में पदक जीतने वाले खिलाडियों को हरियाणा सिविल सेवा,हरियाणा पुलिस सेवा,ग्रुप ए,बी,और सी की नौकरियों में नियुक्ति देने के लिए तैयार की जा रही है। लीगल रिमांमब्रास ने खेमका के नोट पर ऐतराज जताते हुए इसे मुख्य सचिव के समक्ष उठाया है। बहरहाल इस विवाद के चलते मामला निपटारे के लिए मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया और अब वे ही इस पर फैसला करेंगे।
Published on:
8 Aug 2018, 6:18 PM IST
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