
नई दिल्ली। भारत में इस समय की सबसे छोटी करेंसी नोट को आज सौ साल पूरे हो गए हैं। 30 नवंबर 1917 में पहली बारे छापे गए एक रूपए के नोट को प्रचलन में आए आज सौ साल हो गए हैं। हालांकि मार्केट में बाकी नोटों के मुकाबले इस नोट का वितरण काफी काम है। एक रुपए के नोट को छापने की वजह से इसका अबतक का सफर काफी दिलचस्प है।
यहां से शुरु होता है एक रुपए का सफर...
पहले एक रूपए के मुद्रा के लिए चांदी के सिक्कों का प्रचलन था, लेकिन प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान सरकार चांदी के सिक्कों को ढालने में असमर्थ हो गई। उस वक्त एक रूपए के नोट छापने का फैसला लिया गया। 30 नवंबर 1917 में पहली बार यह नोट छपा गया। इसके लिए हाथ से बने कागजों का इस्तेमाल किया गया। इस नोट पर ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम की तस्वीर भी छपी थी। नोट को तब इंग्लैंड में छापा गया था।
पहले नोट पर तीन हस्ताक्षर
पहली बार जब एक रुपए के नोट जारी हुआ तो उसपर तीन ब्रिटिश वित्त सचिवों के हस्ताक्षर थे। जिनके नाम एमएमएस गबी, एच डेनिंग और एसी मैक्वैटर थे। 9 साल बाद 1926 में इस नोट को छापना बंद कर दिया गया। इसके पीछे की वजह थी कीमत से ज्यादा नोट के छपने की लागत। बाद में साल 1940 में इसकी छपाई फिर शुरू हो गई।
आजादी के बाद पहली बार छपा अशोक स्तंभ
भारत को 1947 में ब्रिटिश साम्राज्य से आजादी मिलने के बाद साल 1949 में एक रुपए के नोट से ब्रिटिश साम्राज्य का निशान हटाकर भारतीय गणराज्य का प्रतीक अशोक स्तंभ लगाया गया। 1994 में कम प्रचलन की वजह से एकबार फिर इसकी छपाई रोक दी गई।
मोदी सरकार ने 2015 में फिर छापा
2015 में एकबार फिर केंद्र सरकार ने इसे छापने का निर्णय लिया। अब बाजार में जो नए नोट आए हैं वो पुराने नोट से बिल्कुल अलग है। इसे इंडिगो-ब्लू से बदल कर गुलाबी-हरा कर दिया है।
एक रुपए का नोट सबसे छोटा ही नहीं सबसे अलग भी है
- अभी तक इस नोट डिजाईन को लगभग 25 बार बदला गया है।
- एक रुपए का नोट आरबीआई नहीं बल्कि सरकार जारी करती है।
- एक रुपए के नोट पर रिजर्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर नहीं बल्कि देश के वित्त सचिव का हस्ताक्षर होता है।
- एक रुपए के नए नोट पर 'स्वच्छ भारत' लिखा बापू का चश्मा और 'एक कदम स्वच्छता की ओर' नहीं है जबकि अन्य नए छापे गए सभी नए नोटों पर यह बना हुआ है।
- एक रूपए के नोट की लागत उसके कीमत से ज्यादा है, इसकी लागत लगभग 1.14 रूपए है।
- यह एक मात्र वास्तविक करेंसी नोट है बाकी सब नोट धारीय नोट होते हैं, इसलिए इसपर 'मै धारक को अदा करने का वचन देता हूं' नहीं छपा हुआ है।
Updated on:
30 Nov 2017 03:05 pm
Published on:
30 Nov 2017 02:59 pm

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