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7 करोड़ का हो गया 950 रुपए से शुरू हुआ बैंक

आजादी के करीब बारह वर्षों बाद शहर के स्टेशन रोड स्थित एक छोटे से कक्ष में मात्र 38 सदस्यों से शुरू हुई बारां नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड बीते 59 वर्षो के कार्यकाल में 24 हजार 870 सदस्यों का परिवार के रूप में सहकारी का वटवृक्ष बन गया।

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7 करोड़ का हो गया 950 रुपए से शुरू हुआ बैंक

बारां नागरिक सहकारी बैंक
आजादी के बाद सहकार क्रान्ति में लगातार बढ़ते रहे कदम
बारां. आजादी के करीब बारह वर्षों बाद शहर के स्टेशन रोड स्थित एक छोटे से कक्ष में मात्र 38 सदस्यों से शुरू हुई बारां नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड बीते 59 वर्षो के कार्यकाल में 24 हजार 870 सदस्यों का परिवार के रूप में सहकारी का वटवृक्ष बन गया। तब से अब तक के दौर कई उतार-चढ़ाव आए, कई बैंकिंग संस्थान बंद हो गए, लेकिन नागरिक बैंक प्रतिस्पद्र्धा में डटा रहा।
बैंक की साख का शहर के व्यापारियों, उद्यमियों के आपसी सहयोग व अध्यक्ष, प्रशासक व संचालक मंडल की कुशलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1959 में प्रति सदस्य मात्र 25 रुपए हिस्सा राशि एकत्र की। जिन 38 सदस्यों ने कुल 950 रुपए की हिस्सा पूंजी से बैंक की शुरुआत की, वह अब करोड़ों में पहुंच चुकी है। 31 मार्च 2018 तक बैंक की हिस्सा पूंजी 7 करोड़ 09 लाख, अमानतें 225 करोड़ 77 लाख, बकाया ऋण 150 करोड़ 21 लाख, कार्यशील पूंजी 255 करोड़ 5 लाख, एवं फण्ड्स 14 करोड़ 84 लाख हो गया है। इस दौरान 15 अध्यक्ष एवं 13 प्रशासक, संचालक मंडल की कार्य कौशलता से बैंक ने आधुनिक तकनीक के युग में प्रवेश करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र की वाणिज्य व निजी क्षेत्र की बैंकों के समान सभी व्यापारिक व मोबाइल, नेट बैंकिंग, एटीएम जैसी सेवाएं देना शुरू कर कीर्तिमान स्थापित किया है। जिले की सभी दिशाओं में बैंक 8 शाखाएं संचालित हंै।
अपनाया था महाराष्ट्र का मॉडल
साठ के दशक में मूलत: मुम्बई महाराष्ट से सम्बद्ध यहां के प्रमुख उद्योगपति राधाकिशन साबू ने लोगों को महाजनी ब्याज से मुक्त कराने के लिए महाराष्ट्र मॉडल की तर्ज पर बैंक की आधारशिला रखी थी। राजस्थान राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम 1953 के तहत 17 फरवरी 1959 को बारां नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड का पंजीकरण हुआ तथा अप्रेल 1959 में विधिवत रूप से बैंकिंग कार्य शुरू किया गया। साबू ने बैंक के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला तथा 26 अप्रेल 1961 तक अध्यक्ष रहे। वर्तमान में बैंक के सोलहवें निर्वाचित अध्यक्ष जयनारायण हल्दिया हैं।
किराए की दुकान से आठ शाखाओं का सफर
स्टेशन रोड स्थित वर्तमान केन्द्रीय सहकारी बैंक भवन के एक छोटे से कमरे से शुरूआत के बाद बैंक का प्रधान कार्यालय धर्मादा चौराहा स्थित एक छोटी सी किराए की दुकान में तथा उसके बाद सेठ गणपतलाल अग्रवाल के मकान एवं मैन मार्केट स्थित किराए के भवन में संचालित रहा। वर्ष 1990 में चारमूर्ति चौराहा के समीप निजि भवन खरीदा। अभी इसी भवन में प्रधान कार्यालय (प्रशासनिक) एवं एक शाखा संचालित है। बैंक के आधुनिकीकरण में पूर्व अध्यक्ष रामस्वरूप राठौर की भूमिका भी अहम रही।
अब देश में कहीं भी लेनदेन
वर्र्ष 2004 के बाद बैंक ने तेजी से प्रगति की। इससे पहले वर्ष 2003 में कम्प्यूटराइजेशन किया गया। इससे पहले बैंक के सभी काम हाथ से (मैन्युवल) किए जाते थे। अब पूर्ण डिजिटलाइजेशन किया जा चुका है। यहां तक बैंक की दैनिक बचत योजना में भी मोबाइल से राशि संग्रह किया जा रहा है। सेवा आधारित बैंकिंग क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए सभी शाखाओं में कोर बैंकिंग समाधानों पर कार्य शुरू किया। बैंक की सभी शाखाओं का आपस में लेन-देन करने, एटीएम कार्ड जारी करने, मोबाइल बैंकिंग, पर्सनलाइज्ड चेक बुक, सीटीएस क्लीयरिंग एवं देश में आरटीजीएस/एनईएफ.टी तथा खातों में एसएमएस जैसी नवीनतम व विकसित बैंकिंग सुविधा दी जा रही है।
ऋण नहीं लिया, सदस्यों को लाभांश दिया
बैंक सूत्रों का कहना है कि अब तक बैंक ने केन्द्र एवं राज्य सरकार या अन्य कहीं से भी अंशदान, ऋण या ऋणों की गारंटी प्राप्त नहीं की है। किसी भी वित्तीय संस्था की सहायता प्राप्त किए बिना तथा किसी सरकारी प्रबंधकीय सहयोग के बिना बैंक ने सहकारी नेतृत्व एवं बैंक सेवा से ही प्रबन्धकीय क्षमता का विकास कर, बैंक का सफल संचालन किया है। सदस्यों को शुरू से ही लाभांश दिया जा रहा है।
-बैंक की प्रगति में व्यापारियों, ग्राहकों, हिस्साधारक सदस्यों व उद्यमियों के सहयोग रहा है। आगामी समय में दो नई शाखाएं खोलने, मुख्य शाखा में स्वचालित नकदी जमा करने की मशीन लगाने लक्ष्य है। एटीएम कार्ड से देश के किसी भी क्षेत्र में राशि निकालने, ऑनलाइन खरीद, राशि ट्रांसफर आदि सुविधा दी जा रही है।
-श्याम सुन्दर शर्मा, महाप्रबंधक, बारां नागरिक सहकारी बैंक लि.