देहरादून। पहाड़ से पलायन रोकना है तो रोजग़ार देना पड़ेगा, जब दिव्या रावत यह कहती हैं, तो उनकी आवाज में वो दर्द और वेदना झलकती है, जिसे पहाड़ के युवा सदियों से झेल रहे हैं। दिव्या, गांव-गांव में मशरूम की खेती के प्रति अलख जगा रही हैं। वह कहती हैं, मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता हूं। दिल्ली से सोशल वर्क में मास्टर डिग्री ली, दो साल एक एनजीओ के साथ जुड़कर काम किया और फिर लौट आई अपने गांव।