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पलायथा ने बनाई बागवानी में पहचान

कभी पूरे संभाग में सर्दियों के लड्डू के नाम से मशहूर यहां के अमरूद इस मौसम में भी पेड़ों पर लदा हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे अमरूदों के ठेले वाहन चालकों का ध्यान खींच लेते हैं। लगभग तीन दशक पूर्व यहां अमरूद के बगीचे लगाने की शुरुआत हुई थी, जो अब जिले में सर्वाधिक बगीचे वाला गांव बन गया।

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Kanchan Arora

Sep 05, 2023

पलायथा ने बनाई बागवानी में पहचान

पलायथा ने बनाई बागवानी में पहचान

गुणवत्ता से खासी पहचान
यहां के लखनऊ 45 किस्म के अमरूदों ने तो दो दशक पूर्व राज्य स्तर पर पुरस्कार प्राप्त कर अपनी गुणवत्ता से खासी पहचान बनाई है। भौगोलिक दृष्टि और मिट्टी की खासियत में बागवानी गुण के कारण यहां पौधे जल्दी विकसित होकर फल देने लगते हैं। लेकिन इस बार गर्मी और बरसात में भी अमरूद की पैदावार होने के साथ ही यह क्षेत्र अब अमरूद हब बन गया है।
कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर डीके सिंह का कहना है, इस वर्ष गर्मी के मौसम में बरसात होने के कारण अमरूद के पत्ते नहीं गिरे और पेड़ों पर फूल आ गए। इसके चलते बे मौसम अमरूद पेड़ों पर लदे हुए हैं। क्षेत्र में विभिन्न गांवों में लगभग 110 हैक्टेयर भूमि में 120 से अधिक अमरूदों के बगीचे हैं, जिनमें लखनऊ 45, इलाहाबाद सफेदा, बर्फ खान गोला, किस्म के सर्वाधिक बगीचे हैं, जो कृषक को प्रति हेक्टेयर लगभग तीन लाख रुपए की वार्षिक आय देते हैं।
- सुरेंद्र नागर