
एशिया में नष्ट हो गए हाथियों के 64% से अधिक निवास स्थान
कैलिफोर्निया। सैंकड़ों वर्षों के दौरान वनों की कटाई, कृषि और बुनियादी ढांचे के लिए भूमि के मानवीय उपयोग में वृद्धि के परिणामस्वरूप हाथियों ने पूरे एशिया में अपने आवास का लगभग दो-तिहाई हिस्सा खो दिया है। एशियाई हाथी जो लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध है, वह महाद्वीप के 13 देशों में पाया जाता है। जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार 1700 के बाद से एशिया में हाथियों के लिए उपयुक्त 64 फीसदी आवास (33 लाख वर्ग किमी पर फैले जंगल और घास के मैदान) नष्ट हो गए हैं। सबसे बड़ी गिरावट चीन (94%) में दर्ज हुई, जहां 1700 से 2015 के बीच हाथियों के निवास स्थान नष्ट हुए। जबकि दूसरे स्थान पर भारत (86%) में यह नुकसान सर्वाधिक हुआ।
मानव और पशु संघर्ष बढ़ने की आशंका:
बांग्लादेश, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया के सुमात्रा में आधे से अधिक हाथियों के निवास स्थान बर्बाद हो गए हैं। भूटान, नेपाल और श्रीलंका में भी महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई, खासकर उन क्षेत्रों में जहां हाथी आज भी घूमते हैं। घटते आवासों की वजह से मनुष्य और हाथियों के बीच संघर्ष बढ़ने की आशंका है। हालांकि यह एक ऐसी स्थिति है, जिसे उचित योजना से टाला जा सकता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से जुड़ीं जीव विज्ञानी और शोध की प्रमुख लेखिका शरमिन डी सिल्वा के अनुसार इन आवासों को बहाल करने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें स्थिर रखा जाए। इसके बजाय हमें उन लोगों (ग्रामीण कृषकों, स्वदेशी समुदायों) की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत है, जो अक्सर आर्थिक व्यवस्थाओं में हाशिए पर हैं।
हाथियों के विचरण का दायरा भी घटा:
शोधकर्ताओं ने पाया कि 1700 से हाथियों के निवास स्थान के नुकसान में तेजी आई, जो इस क्षेत्र के यूरोपीय उपनिवेशीकरण के विस्तार के साथ मेल खाता है। इस दौरान सड़क व बांधों के निर्माण, खनन, वनों की कटाई में वृद्धि हुई और उस भूमि पर खेती अधिक होने लगी जो वन्यजीवों का आवास बन सकती थी। लगभग तीन शताब्दी पहले एक हाथी अपने लिए उपलब्ध आवास के 40 फीसदी हिस्से में बिना किसी रुकावट के घूम सकता था क्योंकि यह एक बड़ा क्षेत्र था, जिसमें कई पारिस्थितिक तंत्र शामिल थे। लेकिन 2015 तक मानवीय गतिविधियों के कारण यह दायरा घटकर 7.5 प्रतिशत ही रह गया।
विशाल जीव के लिए संरक्षित क्षेत्र छोटे:
हाथियों के पलायन से चुनौतियां बढ़ने लगी हैं। 2021 में चीन के युन्नान प्रांत में संरक्षित क्षेत्र से पलायन करने वाले हाथियों के झुंड ने 500 किमी से अधिक की यात्रा की, फसलों को रौंदा, कस्बों में घूमते हुए आठ करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान किया। हाथियों और मनुष्यों के बीच संघर्ष से बचने के लिए डेढ़ लाख निवासियों को स्थानांतरित करना पड़ा। हाथी आमतौर पर लंबे समय तक जीवित रहते हैं और इसलिए जब वे अपना घर खो देते हैं, तो नए की तलाश में निकल जाते हैं। एशिया में संरक्षित क्षेत्र छोटे हैं और अधिक ऊंचाई पर ऊबड़-खाबड़ इलाकों तक सीमित हैं। दक्षिण एशिया में भारत और श्रीलंका हाथियों की सबसे बड़ी आबादी के घर हैं। लेकिन वनस्पति में कमी, रेल दुर्घटनाएं और बिजली के तारों से उलझकर होने वाले हादसे भी भारत में इनके लिए खतरे हैं।
एशियाई हाथियों की दुनिया
Published on:
29 Apr 2023 11:24 am
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