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अन्ना का दूसरा नाम है ‘अनशन’, सिर्फ जनलोकपाल ही नहीं इन मांगों के लिए भी कर चुके हैं आंदोलन

भले ही आज के युवा को अन्ना का नाम लेते ही जन लोकपाल बिल की याद आती है लेकिन अन्ना ने इससे पहले भी कई अनशन किये हैं।

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anna andolan

नई दिल्ली: 7 साल के बाद किसन बाबूराव हजारे यानि अन्ना हजारे ने एक बार फिर अनशन का ऐलान किया है।सात साल पहले जब अन्ना ने अनशन किया था, तब पूरे देश ने उनका साथ दिया था और एक बार फिर 80 साल के इस इंसान ने किसानों को उनका हक दिलाने समेत कई मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।2011 वो साल था जब देश का बच्चा-बच्चा अन्ना के नाम को जानने लगा था।भले ही आज के युवा को अन्ना का नाम लेते ही जन लोकपाल बिल की याद आती है लेकिन अन्ना ने इससे पहले भी कई बार अनशन कर सरकारों को झुकने पर मजबूर कर दिया। अन्ना के अनशन कर मांग मनवाने के तरीके की वजह से उन्हें दूसरा गांधी भी कहा जाता है।चलिए आपको बताते हैं अन्ना ने जन लोकपाल के अलावा कब और कौन-कौन से अनशन किए हैं।

1-महाराष्ट्र का भ्रष्टाचार आंदोलन (1999)

1999में अन्ना हजारे ने भाजपा और शिवसेना सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। अन्ना ने सरकार के मंत्री महादेव शिवांकर, शशिकांत सुतार और बबन घोलाप पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगाते हुए सरकार से उन्हे तत्काल पदमुक्त करने की मांग रखी थी। सरकार ने अन्ना को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन अन्ना टस से मस न हुए और आखिरकार हार कर उन्हें सुतार और शिवांकर को पद से हटाना पड़ा। लेकिन बबन ने अन्ना के खिलाफ मानहानि का दावा कर दिया था और कोर्ट में सुबूत न दे पाने के कारण अन्ना को 3 महीने जेल में रहना पड़ा था।

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2-राइट टू इंफार्मेशन की लड़ाई

अन्ना ने 1997 में राइट टू इंफार्मेशन के लिए अपनी लड़ाई शुरू की। 9 अगस्त 2003 को अन्ना ने मुंबई के आजाद मैदान से अनशन की शुरूआत की और 12 दिन के अनशन में अन्ना को भारी समर्थन मिला। परिणाम ये हुआ कि महाराष्ट्र सरकार ने उसी साल राइट टू इंफार्मेशन बिल को पास किया।

2006 में अन्ना ने एक बार फिर राइट टू इंफार्मेशन बिल में सुधार के खिलाफ अनशन किया और इस बार अन्ना का अनशन 11 दिन चला।आखिरकार हारकर सरकार ने बिल संशोधन का इरादा त्याग दिया।

3-साल 2003 में अन्ना ने कांग्रेस और एनसीपी के चार मंत्रियों- सुरेश दादा जैन, नवाब मलिक, विजय कुमार गावित और पदम सिंह पाटिल को भ्रष्ट बताते हुए अनशन किया और आखिरकार सरकार को अन्ना के आगे झुकना पड़ा।

इस आंदोलन के बाद अन्ना ने 2011 में महाराष्ट्र की सीमा को लांघकर देश की राजधानी में आकर जनलोकपाल का ऐतिहासिक आंदोलन किया।इस आंदोलन ने पूरे देश में अन्ना के नाम की आंधी चला दी।

2011 के बाद ये दूसरा मौका है जब अन्ना ने सरकार के खिलाफ अनशन किया है।देखना होगा कि सरकार अन्ना की कब और कितनी मांगें मानती है।


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