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जीत की होड़ मे जमकर दौड़े बैल, देखने वालों की थमी सांसें

-पशु पालकों ने छकड़ा रेस में आजमाई बैलों की ताकत-पुरनी की बैल जोड़ी ने मारी बाजी, राजोरा की बैलगाड़ी रही दूसरे नंबर पर-संत कालूबाबा मेेले में हुई बैलगाड़ी दौड़, हजारों ग्रामीण पहुंचे

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खंडवा

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Manish Arora

Jan 16, 2020

जीत की होड़ मे जमकर दौड़े बैल, देखने वालों की थमी सांसें

-पशु पालकों ने छकड़ा रेस में आजमाई बैलों की ताकत-पुरनी की बैल जोड़ी ने मारी बाजी, राजोरा की बैलगाड़ी रही दूसरे नंबर पर-संत कालूबाबा मेेले में हुई बैलगाड़ी दौड़, हजारों ग्रामीण पहुंचे

खंडवा. भारत को परंपराओं का देश भी कहा जाता है। विभिन्न पर्वों पर अलग-अलग स्थानों में अलग-अलग परंपराएं मनाई जाती है। जिले के बोरगांव बुजुर्ग के पास स्थित ग्राम राजोरा में बैलगाड़ी रेस का आयोजन मकर संक्रांति पर्व पर किया जाता है। पशु पालक अपने पशुओं की ताकत आजमाने के लिए छकड़ा रेस लगाते है। बुधवार मकर संक्रांति पर हुई छकड़ा रेस में जीत की होड़ में बैलों ने ऐसी दौड़ लगाई कि देखने वालों की सांसें थम सी गई। चार घंटे चली छकड़ा रेस में पुरनी गांव की बैल जोड़ी ने बाजी मारी, दूसरे स्थान पर राजोरा की बैलगाड़ी रही।
ग्राम राजोरा में दो दिवसीय संत कालूबाबा मेला आयोजन के दूसरे दिन बुधवार को छकड़ा रेस का आयोजन किया गया। रेस मे खंडवा सहित खरगोन, बुरहानपुर, हरदा, होशंगाबाद, भोपाल व महाराष्ट्र के जलगांव जिले से कुल 42 बैलगाड़ी ने भाग लिया। प्रथम चरण में तीन-तीन बैलगाड़ी को रेस मे दौड़ाया गया और एक विजेता को अलग निकाला गया। फिर दूसरे चरण के बाद सेमी फायनल और फायनल दौड़ हुई। दोपहर 2 बजे से रेस शुरू हुई और देर शाम लगभग 6 बजे अंतिम तीन गाड़ी की दौड़ के साथ रेस व मेले का समापन हुआ। रेस के दौरान जहां एक ओर बैल जोश मे थे। वहीं बैलगाड़ी दौड़ाने वाले के साथ हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शक भी भरपूर जोश मे नजर आए। रेस के दौरान मैदान पर हर बैलगाड़ी में जीत का जोश खुले रूप से नजर आया और भीड़ के बीच जीत अपने नाम करने की होड़ भी दिखाई दी। रेस के फायनल में पूरनी, राजोरा व पिपल्या तीन गांव की बैलगाड़ी दौड़ी। जिसमें पूरनी निवासी सुनील पटेल की बैलजोड़ी को प्रथम पुरस्कार 16 हजार, राजोरा निवासी मालसिंग पटेल की बैलजोड़ी को द्वितीय 8 हजार व पिपल्या निवासी गणेश की बैलजोड़ी को तृतीय पुरस्कार 5 हजार दिया गया।
जोश मे बैलों ने खोया आपा
रेस के दौरान दूर-दूर से आए बैल बड़े जोश मे थे और इस दौरान लगी भीड़ को देख बैल कई बार अपना आपा खो रहे थे। जब बैल अपना आपा खो रहे थे तो उनको संभालने के लिए छह से अधिक युवाओं को भी बैल घसीटते नजर आए। कई बार आयोजनकर्ताओं ने सहयोग कर बैलों को कंट्रोल किया। इधर जब जोश मे बैल दौड़ते तो कई बार ग्रामीण भी बैलगाड़ी को देखने के लिए उत्सुकता के साथ पीछा करते नजर आए। दर्शक रेस मे जीतने वाली बैलगाड़ी को देखने के लिए उत्साहित नजर आए।