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कैनाइन डिस्टेम्पर का संक्रमण… पालतू पेट्स की हो रही असमय मौत

अगर आपको श्वान पालने का शौक है तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। मौसम में बदलाव के साथ ही पालतू पैट्स में कैनाइन डिस्टेम्पर बीमारी तेजी से फैल रही है। इससे श्वान मर रहे हैं। पशु चिकित्सालयों में इस बीमारी से ग्रसित श्वान इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

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अलवर

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Umesh Sharma

Aug 29, 2024

अलवर.

अगर आपको श्वान पालने का शौक है तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। मौसम में बदलाव के साथ ही पालतू पैट्स में कैनाइन डिस्टेम्पर बीमारी तेजी से फैल रही है। इससे श्वान मर रहे हैं। पशु चिकित्सालयों में इस बीमारी से ग्रसित श्वान इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। दरअसल, इस बीमारी से ग्रसित श्वान के संपर्क में आने पर दूसरे श्वान इसका शिकार हो रहे हैं। अगर आपकी कार के टायर या जूते-चप्पल पर बीमार श्वान की उलटी या मल लग गया है तो इसके संपर्क में आते ही अपका श्वान बीमार हो जाएगा। एक ग्राम उल्टी से सैकड़ों श्वान बीमार हो सकते हैं।

ये है बीमारी के लक्षण

यह बीमारी कुत्तों के श्वसन तंत्र और तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है। इससे आंखों और नाक से पानी बहना, खूनी दस्त, बुखार, खांसी, सुस्ती, भूख में कमी, उल्टी-दस्त के साथ मांसपेशियों में ऐंठन जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। श्वान का वजन घटने लग जाता है और छोटे श्वान मर जाते हैं। इस तरह के लक्षण मिलने पर श्वान को पशु चिकित्सक को दिखाएं।

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श्वान को लगवाएं टीके

श्वान में चार से छह हफ्ते में वैक्सीनेशन शुरू हो जाना चाहिए और 12 से 16 हफ्तों में सभी टीके लगने चाहिए। इसके बाद हर साल बूस्टर डोज लगवाएं। सभी वैक्सीनेशन अधिकृत पशु चिकित्सक से ही करवाएं। साथ ही तीन महीने के श्वान को हर 15 दिन, 3 से 6 महीने के श्वान को हर 30 दिन और 6 महीने बाद हर 3 महीने में कृमिनाशक दवा पिलाएं।

डेढ़ से दो महीने का श्वान लाएं

श्वान को खरीदते समय उसके वैक्सीनेशन की पूरी जानकारी रखनी चाहिए। जो श्वान खरीदें या लाएं उसकी उम्र कम से कम डेढ़ से दो महीना होनी चाहिए। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और उसके खानपान में भी सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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कैनाइन डिस्टेम्पर बीमारी तेजी से फैल रही है। श्वानों का वैक्सीनेशन समय पर कराना चाहिए। बुखार, भूख न लगना, खूनी दस्त जैसे लक्षण हो तो उसे हाथाेंहाथ चिकित्सक को दिखाएं।

डॉ. अनुज कुमार तोमर, पशु चिकित्सा अधिकारी