
नई दिल्ली। किसी पार्टी की शान हो या फिर ऑफिस मीटिंग जान, अपने चेहरे को खूबसूरत बनाने के लिए हम न जानें क्या-क्या इस्तेमाल करते हैं। सुंदर और दमकते हुए चेहरे को देखकर कोई हमारी तारीफ करें तो हम फूले नहीं समाते। चेहरे को चमकाने के लिए हम तरह-तरह के कॉस्मेटिक्स का इस्तेमाल करते हैं और खुद को तारीफ का हकदार बनाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि इस कॉस्मेटिक्स को आप तक सुरक्षित पहुचानें के लिए कितने बेजुबानों को अपने आंसू बहाने पड़ते है?
येे सुनकर भले ही आपको ये लगें कि भला प्रसाधन सामग्रियों का इन जानवरों से क्या तात्पर्य? तो इस संदर्भ में आपको बता दें कि जो भी कॉस्मेटिक्स आप इस्तेमाल करते हैं पहले लैब में उसका टेस्ट किया जाता है कि क्या वाकई में ये आपके स्किन को सूट करेगा? क्या इसमें मौजुद केमिकल्स आपको कोई नुकसान तो नहीं पहुचाएगा? आपके स्किन तो सेफ रहेगी?
इन सारे सवालों पर निश्चित होने के लिए लैब में जानवरों के स्किन, उनकी आंखों पर इसका प्रयोग किया जाता है। अधिकतर समय में ये टेस्ट उनके लिए काफी निगेटिव रिएक्शन वाले होते हैं और इसके चलते कभी-कभी इन बेज़ुबानों की बेहद दर्दनाक तरीकें से मौत हो जाती है।
बता दें कि शैम्पू की टेस्टिंग अकसर खरगोशंो पर की जाती है। इस परीक्षण में इन मासूम खरगोशों को पहले एक मशीन में बंद कर दिया जाता है और इसके बाद उनकी आंखों की पलकों को हटाकर उनमें शैम्पू का एक केमिकल डाला जाता है।
इस केमिकल के डालने के बाद वो यदि आंशिक या पूर्ण रूप से अंधे हो जाए तो इस शैंम्पू को इंसानों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है। ठीक इसी तरह क्रीम, शैंपू, परफ्यूम, नेलपॉलिश, फाउंडेशन की जांच चूहों पर की जाती है।
मस्कारा और टूथपेस्ट जैसे कई उत्पादों का टेस्ट हैम्सटर, खरगोश, चूहे और ऐसे ही दूसरे जानवरों पर किया जाता है। लिपस्टिक पर मौजुद हार्मफूल केमिकल्स के टेस्ट के लिए पहले चूहों का मुंह खोलकर उनके मसूंडों पर इसे मला जाता है और उसके कुछ देर के बाद देखा जाता है कि उनके मसूड़े पर छाले तो नहीं पड़े, यदि छाले हो तो वो आपके होठों को नुकसान पहुचा सकता है। मासूम, बेजुबान इन जानवरों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए हमेशा केमिकल रहित या फिर प्राकृतिक प्रसाधनों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए जिससे आपकी स्किन भी हेल्दी रहेगी और किसी मासूम को भी दर्द से गुजरना नहीं पड़ेगा।
Published on:
22 Feb 2018 05:18 pm
