
इचलकरंजी के डीकेटीई में फेसमास्क प्रणाली का निर्माण
इचलकरंजी के डीकेटीई में फेसमास्क प्रणाली का निर्माण
-बिना मास्क घूमने वाले लोगों को ढूंढऩे में मदद करेगी डिटेक्शन प्रणाली
कोल्हापुर
इचलकरंजी के डीकेटीई कम्प्यूटर विभाग के छात्र स्नेहल मिरजे, मृदुला खोत, शांभवी पानवेलकर, रविना निंबालकर और श्वेता कोली ने प्रो. सौ. एस.एस. दरबस्तवार के मार्गदर्शनमें 'फेसमास्क डिटेक्शन सिस्टम्ज यह अभिनव प्रकल्प विकसित किया है। डीकेटीई के छात्र गए सालों से कोरोनासे बचने के लिए प्रतिबंधक उपाय ढूंढकर नया संशोधन कर रहे हैं। कोरोना संसर्ग रोकने के लिए प्राथमिकता के तौर पर मास्क पहनना यह अच्छा पर्याय सामने आया गया है। साथ ही सार्वजनिक जगहों पर हर एक के लिए मास्क का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। लेकिन समाज के कुछ लोग मास्क पहनते नहीं। मास्क पहने तो अच्छे तरीके से पहना नहीं होता है।
इसी बात को डीकेटीई के कम्प्यूटर के छात्रों ने देखकर आर्टिफिशियल इन्टेंलिजेन्स और डीप लर्निंग्ज इस तंत्रज्ञान का इस्तेमाल कर फेसमास्क डिटेक्शन यह प्रकल्प हाथ में लिया है। इसमें किसी ने मास्क पहना है कि नहीं इसकी जांच के लिए विशिष्ट ऐसा आवाज करने वाला अलार्म बजेगा ऐसी प्रणाली विकसित की है। इससे सार्वजनिक जगह पर अलार्म बजेगा जिसने मास्क सीधे तरीके से नहीं पहना है उसको ढूंढा जा सकता है। इस प्रणाली का इस्तेमाल बड़ी कंपनी, रेलवे स्टेशन, बसस्थानक के साथ सार्वजनिक जगह पर भीड़ में किया जा सकेगा। फेसमास्क डिटेक्शन सिस्टम बनाने वाले सभी छात्रों को संस्था संचालक प्रो. डॉ. पी. वी. कडोले, विभागप्रमुख डॉ. डी. वी. कोदवडे का मार्गदर्शन मिला।
Published on:
21 May 2021 08:40 pm
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