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देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का आज है हैप्पी बर्थडे

प्रतिभा देवी सिंह पाटिल वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक देश की 12वीं राष्ट्रपति रहीं

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Jameel Ahmed Khan

Dec 19, 2015

Pratibha Patil

Pratibha Patil

मुंबई। देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल का जन्म 19 दिसंबर 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले के नंदगांव में नारायण राव पाटिल के घर हुआ था। वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक देश की 12वीं राष्ट्रपति रहीं। इंडियन नेशनल कांग्रेस की सदस्य पाटिल देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले वह 2004 से लेकर 2007 तक राजस्थान की राज्यपाल थीं।

पूर्व राष्ट्रपति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जलगांव के आर आर विद्यालय से की। उन्होंने मूलजी जेथा कॉलेज से राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंनें मुंबई के लॉ कॉलेज से विधि की डिग्री हासिल की। विधि करने के बाद उन्होंने गलगांव के कोर्ट में ही वकालत शुरू कर दी। इस दौरान वह महिलाओं से जुड़े सामाजिक कार्यों से जुड़ गईं। उन्होंने 7 जुलाई 1965 को देवीसिंह रनसिंह शेखावत से शादी कर ली। दंपती के एक बेटा और एक बेटी है।

राजनैतिक करियर
1962 में 27 साल की उम्र में प्रतिभा पाटिल जलगांव से विधायक निर्वाचित हुईं। इसके बाद 1967 से 1985 के बीच वह मुक्तेनगर से चाल बार विजयी हुईं। 1985 में वह राज्यसभा के लिए चुन ली गई जहां वह 1990 तक सांसद रही। 1991 में 10वीं लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में वह अमरावती संसदीय क्षेत्र से चुनकर लोकसभा पहुंची। हालांकि, इसी दशक में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया।

महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। वहीं, राज्यसभा और लोकसभा सदस्य रहते हुए भी उन्होंने कई आधिकारिक पद संभाले। वह कुछ सालों तक महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष भी रहीं। 8 नवंबर 2004 को उन्हें राजस्थान का 24वां राज्यपाल नियुक्त किया गया। प्रदेश में यह पद संभालने वाली वह पहली महिला थीं।

प्रेसीडेंसी
राष्ट्रपति पद के लिए पाटिल को यूपीए सरकार ने 14 जून 2007 को घोषित किया। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल और कर्ण सिंह के नामों पर वाम मोर्चाओं के विरोध के बाद ही पाटिल के नाम पर सहमती बनी थी। आम धारणाओं के विपरीत, पाटिल को राष्ट्रपति चुनाव में चुनौती का सामना करना पड़ा था। उन्हें तत्कालीन उपराष्ट्रपति और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भैरों सिंह शेखावत ने चुनौती दी थी। शेखावत इस चुनाव में निर्दलीय खड़े हुए थे और उनका समर्थन भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने किया। हालांकि, मराठी होने के चलते भाजपा के एक अहम सहयोगी शिव सेना ने इस चुनाव में पाटिल का समर्थन किया। 19 जुलाई 2007 को हुए चुनाव में पाटिल ने दो-तिहाई बहुमत से विजय दर्ज की। उन्होंने 25 जुलाई 2007 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली।

विवाद
हालांकि, राष्ट्रपति रहते हुए पाटिल काफी विवादों में भी रहीं। उन्होंने मौत की सजा पाए 35 लोगों की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, जो की एक रिकॉर्ड है। लेकिन, राष्ट्रपति कार्यालय ने उनके इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने गृह मंत्रालय की सिफारिशों के बाद ही ये फैसले लिए। उनके साथ एक और विवाद जुड़ा है और वह यह दूसरे राष्ट्रपतियों के मुकाबले वह सबसे ज्यादा विदेशी दौरों पर गईं। पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद वह जुलाई 2012 को देश के सबसे ऊंचे पद से रिटायर हो गईं।

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