
कोरोना : जरूरी है वायु प्रदूषण पर नियंत्रण
अमरीकी संसदीय समूह ने हाल ही जारी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोनावायरस के दूसरे दौर के हमले से बचने के लिए वायु प्रदूषण के स्तर को कम रखा जाना चाहिए। क्योंकि दुनियाभर में दूषित हवा के संपर्क में आने से कोविड-19 के संक्रमित और मौतों का आंकड़ा बढऩे के सबूत मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान कई स्थानों पर वायु प्रदूषण का स्तर कम हुआ, लेकिन इस स्तर पर बनाए रखने के लिए उचित उपाय नहीं किए गए।
रिपोर्ट वैज्ञानिक, व्यवसायी, स्थानीय अधिकारियों के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें सार्वजनिक परिवहन सेवाओं, लकड़ी-कोयले का प्रयोग और कम हुए औद्योगिक धुएं का अध्ययन शामिल है। रिपोर्ट में जैविक तंत्र के नए सबूत भी सामने आए हैं, जो बता सकते हैं कि वायु प्रदूषण कोरोनो को बढ़ाने में कैसे सहायक है। साथ ही यह भी पता चल सकता है कि कुछ जनजाति समूह वायरस से कैसे प्रभावित हुए।
सांसद गेरेंट डेविस का कहना है कि हमें लॉकडाउन के बाद शुरू दैनिक जीवन पर निगाह रखनी है। प्रदूषण को कम करने के लिए जरूरी है यात्रा कम की जाए और यात्रा कम होगी तो वायरस का संचलण लोगों के बीच कम होगा। इसलिए सडक़ों से वाहनों के दबाव को रोकना हमारी रणनीति का हिस्सा होना चाहिए। इसी प्रकार प्रदूषण के कण वायुमार्ग से कोशिकाओं में प्रवेश कर उन्हें कमजोर कर देते हैं। हार्वर्ड के प्रोफेसर राहेल नेथरी का कहना है कि वायु प्रदूषण और कोरोना एक साथ होना और भी खतरनाक है। नेथरी ने बताया कि वायु प्रदूषण विभिन्न नस्लीय समूहों के बीच कोरोना की मृत्युदर के अंतर को समझने में मदद कर सकता है। हार्वर्ड टीम ने शुरू में अनुमान लगाया था कि मृत्युदर में वृद्धि के लिए 15 फीसदी सूक्ष्म धूल कण जिम्मेदार हैं, जिसे बाद में दूसरे विश्लेषण में 8 फीसदी माना गया।
Updated on:
11 Jun 2020 07:19 pm
Published on:
11 Jun 2020 07:13 pm

बड़ी खबरें
View Allखास खबर
ट्रेंडिंग
