
कढ़ी पत्ता की खेती
मीठी नीम एक उष्णकटिबंधीय पौधा है। यह सीधी धूप में अच्छी ग्रोथ करता है। इसके लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है। इसकी खेती के लिए खेत की दो से तीन बार जुताई आवश्यक है। हर जुताई के बाद खेत को समतल कर लेना चाहिए। इसके बाद खेत में तीन से चार मीटर की दूरी पर हलके गड्डे पंक्ति के रूप में तैयार कर लें। प्रत्येक पंक्तियों के बीच समान दूरी बनाकर रखें। इसके बाद पुरानी गोबर की खाद और जैविक उर्वरक की उचित मात्रा को मिट्टी में मिलाकर उन गड्डों में 15 दिन पहले भर दें और सिंचाई कर दें। इसके बीजों को खेत में तीन से चार मीटर की दूरी पर बनाए गए गड्डों में लगभग तीन से चार सेंटीमीटर नीचे बोया जाता है। बीजों को रोपाई से पहले लगभग दो से तीन घंटे गोमूत्र में भिगोकर रखना चाहिए। इसके पौधे एक बार सही ढंग से लगाने के बाद सालों तक पैदावार देते हैं। एक एकड़ में लगभग 70 किलों बीज की आवश्यकता रहती है।
नियमित सिंचाई आवश्यक
मीठी नीम के पौधे को पानी की अधिक मात्रा में आवश्यकता रहती है। गर्मी के मौसम में नियमित रूप से सिंचाई अवश्य करें। निराई गुड़ाई के समय ध्यान रखें इन पौधों की जड़ें बाहर न निकली हों। अगर जड़ें बाहर नजर आएं तो उन पर मिट्टी डाल दें।
फसल कटाई का सही तरीका
मीठी नीम की पत्तियों को वैसे तो आवश्यकता पडऩे पर किसी भी समय तोड़ा जा सकता है, लेकिन सही मायने में पौधे की शाखाओं में जब पत्तियां पूर्ण विकसित हो जाएं, तो तुड़ाई आरम्भ की जानी चाहिए। सिर्फ बड़ी पत्तियों की तुड़ाई ही करनी चाहिए, अविकसित पत्तियों की तुड़ाई नहीं करनी चाहिए।
छाया में सुखाएं
मीठी नीम की पत्तियों को तोड़कर छाया में सुखाएं। समय-समय पर पलटते रहें, ताकि पत्तियां सडऩे न पाएं। इस तरीके से सुखाई पत्तियों के बनाए चूर्ण की गुणवत्ता बहुत अच्छी रहती है और इसमें प्राकृतिक खुशबू बनी रहती है।
Updated on:
13 Jul 2022 02:37 pm
Published on:
13 Jul 2022 02:32 pm
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