
नोएडा। सेक्टर-30 स्थित जिला अस्पताल में ई-हॉस्पिटल की शुरुआत हो गई है। इसके माध्यम से मरीजों का इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल डाटा रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। सॉफ्टवेयर के डेटा में मरीज का एक बार नाम दर्ज होने के बाद उसे बार-बार पर्ची लाने की भी जरूरत नहीं होगी। बस उसे अपना आधार नंबर याद रखना होगा।
एक बार पंजीकरण कराओ, फिर केवल आधार नंबर बताओ
जिला अस्पताल में मरीजों का पंजीयन से लेकर सभी काम ऑनलाइन हो गए हैं। इससे बड़े अस्पतालों की तर्ज पर मरीजों को बार-बार पंजीयन कराने से छुटकारा मिल गया है। एक बार पंजीयन होने के बाद जब भी मरीज इलाज कराने दोबारा अस्पताल आएंगे, तो आधार नंबर पर पूरी जानकारी मिल जाएगी। ई-हॉस्पिटल से एक बार पर्ची लेने पर मरीज का यूएचआईडी नंबर जारी होगा। इस यूएचआईडी नंबर से वह कभी भी ऑनलाइन अपना पंजीकरण करा सकता है। इससे उनका इलाज आसानी से हो सकेगा।
पहले दिन 30 लोगों ने कराया ऑनलाइन पंजीकरण
जिला अस्पताल में मरीजों को जानकारी न होने के चलते ज्यादातर मरीजों ने ऑनलाइन सुविधा का प्रयोग नहीं किया। जिसके चलते ऑनलाइन पंजीकरण काउंटर पर ज्यादा भीड़ नजर नहीं आई। ऑनलाइन पंजीकरण काउंटर में बैठे राहुल ने बताया कि लोगों को अभी ज्यादा जानकारी न होने के चलते पहले दिन केवल 30 लोगों ने ही ऑनलाइन पंजीकरण कराया। इन सभी लोगों को यूएचआईडी नंबर जारी कर दिया गया है।
मोबाइल पर आएगा संदेश
अस्पताल में पंजीकरण कराने के लिए अभी तक मरीजों को पर्ची काउंटर पर घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता है। लाइन में अक्सर मरीजों की आपस में धक्का-मुक्की भी होती है, जिससे मरीजों और तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है। ई-अस्पताल बन जाने के बाद इस समस्या से मरीजों को निजात मिलेगी। वह घर बैठे ही पंजीकरण करा सकेंगे। पंजीकरण कराने के बाद उनके मोबाइल पर एक संदेश आ जाएगा, जिसे दिखाकर वह अस्पताल में इलाज करा सकेंगे। ऑनलाइन पंजीकरण अस्पताल के कंप्यूटर पर भी नजर आएगा, जिससे इन मरीजों को पहले इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाएगी।
फोन पर देख सकेंगे जांच रिपोर्ट
अभी तक मरीजों को जांच कराने के बाद रिपोर्ट लेने के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे। जो मरीज ऑनलाइन के माध्यम से अस्पताल आएंगे। उनकी जांच रिपोर्ट भी मोबाइल पर ही मिल जाएगी, जिससे उन्हें अस्पताल के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
अब टोकन से चलेगी ओपीडी
अब ओपीडी में टोकन व्यवस्था लागू कर दी गई है। मरीजों को ओपीडी में मौजूद गार्डों द्वारा टोकन दिए जा रहे हैं। टोकन के अनुसार ही मरीज चिकित्सकों के कक्ष में जाएंगे। ओपीडी में रोजाना इलाज के लिए 200 से 300 मरीज आते हैं। ऐसे में चिकित्सकों के कक्ष के आगे मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं, जिससे अस्पताल में अफरातफरी का माहौल रहता है।
Published on:
27 Oct 2017 06:55 pm
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