5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तलाकशुदा पत्नी भी घर में रहने की दावेदार है!

कानून: घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत निवास का हक है

less than 1 minute read
Google source verification

जयपुर

image

Mohmad Imran

Oct 30, 2020

तलाकशुदा पत्नी भी घर में रहने की दावेदार है!

तलाकशुदा पत्नी भी घर में रहने की दावेदार है!

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही एक अहम फैसले में कहा कि कोई तलाकशुदा महिला रिश्तेदारों के स्वामित्व वाले साझा घर में भी रहने का दावा कर सकती है। यानी वह पति के घर के अलावा ऐसे रिश्तेदार के घर (जो ससुराल से संबंधित हो) में भी रहने के लिए दावा कर सकती है जहां वह पति के साथ कुछ समय तक स्थायी रूप से रही हो। पीठ ने अधिनियम की धारा 2 (S) में दी गई 'साझा घर' की परिभाषा की भी व्याख्या की है।

फैसले में ये भी कहा
-घरेलू संबंध में रहने वाला घर भी साझा घर बन जाएगा
-घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 17 व 19 की धारा 2 (S) पात्रता देती है
-अधिनियम का उद्देश्य पीडि़ता को तत्काल राहत देना है
-ऐसा न करना महिला सुरक्षा अधिकारों का हनन होगा

धारा 19 है महिला सुरक्षा अधिकारों कि रक्षक
घरेलू हिंसा अधिनियम (2005) की धारा 19 किसी महिला को साझा घर में रहने का अधिकार प्रदान करती है जिसके अंतर्गत घरेलू रिश्ते में औरत साझा घर में रहने की हकदार होगी। धारा 12 पीडि़ता को एक से अधिक राहत पाने में मददगार है।

साझा घर पर यह कहा
एस आर बत्रा बनाम तरुणा बत्रा (2006) मामले को पलटते हुए पीठ ने कहा कि साझा घर एक ऐसा घर होता है जहां पीडि़ता किसी भी तरह से पति के साथ किसी भी अवस्था में घरेलू संबंध में रहती थी। यानी केवल पति का घर ही उसका साझा घर नहीं होगा।

यह भी जानें
जस्टिस एसबी सिन्हा और जस्टिस एम काटजू की पीठ ने यह भी कहा कि वैकल्पिक आवास के लिए दावा केवल पति के खिलाफ ही किया जा सकता है, ससुराल वालों या पति के अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ नहीं। हालांकि, हमें साझा घर की परिभाषा को भी ठीक से समझना होगा।