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कम उम्र में यौवन और प्रसव से बढ़ते हैं दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम

शोध टीम ने यूके बायोबैंक के लगभग 2 लाख महिलाओं के जेनेटिक डेटा का अध्ययन किया। उन्हें 150 से ज्यादा जीन मिले, जो प्रजनन समय से जुड़े हैं। ये जीन शरीर में ऊर्जा, पोषण और तनाव संभालने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं।

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जयपुर। अगर किशोरावस्था (पीरियड्स शुरू होना) या प्रसव जल्दी हो जाए, तो इसका असर पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है। बक इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लड़कियों के पीरियड्स 11 साल से पहले शुरू हो जाते हैं या जिन महिलाओं का पहला बच्चा 21 साल से पहले हो जाता है, उनमें स्वास्थ्य संबंधी जोखिम दोगुने तक बढ़ जाते हैं। इन महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और हार्ट फेलियर जैसी बीमारियों का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है। गंभीर मेटाबॉलिक बीमारियों (चयापचय संबंधी रोग) का खतरा तो चार गुना तक बढ़ सकता है। इसके विपरीत, जिन महिलाओं में यौवन या प्रसव देर से होता है, वे ज़्यादा लंबा और स्वस्थ जीवन जीती हैं और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा भी कम रहता है। बक इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. पंकज कपाही के अनुसार, यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य देखभाल के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनका कहना है —
“अक्सर महिलाओं से मेडिकल चेकअप में उनके पीरियड्स और बच्चों के बारे में पूछा जाता है, लेकिन इस जानकारी को प्रसूति (OB/GYN) से अलग स्वास्थ्य सेवाओं में शायद ही कभी ध्यान में लिया जाता है। जबकि यह कारक जीवनभर की कई बीमारियों को प्रभावित करते हैं।”

जीन और उम्र बढ़ने का संबंध

शोध टीम ने यूके बायोबैंक के लगभग 2 लाख महिलाओं के जेनेटिक डेटा का अध्ययन किया। उन्हें 150 से ज्यादा जीन मिले, जो प्रजनन समय से जुड़े हैं। ये जीन शरीर में ऊर्जा, पोषण और तनाव संभालने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं। पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर डॉ. यीफान ज़ियांग बताते हैं कि इनमें से कई जीन “लॉन्गेविटी पाथवे” यानी दीर्घायु नियंत्रित करने वाले मार्गों से जुड़े हैं, जैसे IGF-1, ग्रोथ हार्मोन, AMPK और mTOR सिग्नलिंग।

जल्दी बच्चे होने से तेज़ी से बढ़ती उम्र

डॉ. कपाही कहते हैं कि विकास (Evolution) का ध्यान सबसे पहले जीवित रहने और प्रजनन पर होता है, लेकिन इसका एक दुष्प्रभाव भी है। “हमारा अध्ययन दिखाता है कि जो जेनेटिक कारक जल्दी बच्चे पैदा करने में मदद करते हैं, वे बाद के जीवन में मां की सेहत पर भारी पड़ते हैं। यह संतानों को तो बचाते हैं, लेकिन मां के लिए बीमारियां और तेज बुढ़ापा लाते हैं।” यह Antagonistic Pleiotropy Theory को समर्थन देता है — यानी जो गुण जीवन की शुरुआत में फायदेमंद होते हैं, वही उम्र बढ़ने के साथ नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी तरह Disposable Soma Theory भी लागू होती है, जिसके अनुसार शरीर अपने संसाधन प्रजनन पर खर्च कर देता है और मरम्मत/संरक्षण पर ध्यान कम करता है, जिससे उम्र तेजी से बढ़ती है।

बॉडी वजन का असर

अध्ययन में पाया गया कि जिन महिलाओं में जल्दी यौवन या प्रसव होता है, उनका BMI (बॉडी मास इंडेक्स) बाद में अधिक होता है। बढ़ा हुआ वजन डायबिटीज, हार्ट फेलियर और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा और बढ़ा देता है। डॉ. कपाही बताते हैं — “अगर शरीर पोषण बेहतर तरीके से अवशोषित करता है तो संतान को लाभ मिलता है, लेकिन आज के समय में भोजन की अधिकता के कारण यही गुण मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ा देते हैं।”

स्वास्थ्य देखभाल के लिए संकेत

इस शोध के अनुसार, यौवन और प्रसव का समय स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा होना चाहिए। अगर लड़की में पीरियड्स जल्दी शुरू होते हैं या महिला का प्रसव जल्दी होता है, तो उनकी स्क्रीनिंग और जीवनशैली पर खास ध्यान देना चाहिए। अमरीका में देखा गया है कि 1970 के दशक से अब तक, लड़कियां हर दशक में औसतन तीन महीने पहले पीरियड्स शुरू कर रही हैं। इसका एक कारण मोटापा भी हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह जानकारी भविष्य में ऐसे जेनेटिक मार्गों पर काम करने में मदद करेगी, जिससे माताओं और बच्चों दोनों की सेहत बेहतर हो सके।

यह अध्ययन eLife जर्नल में प्रकाशित हुआ है।