
शहडोल. सबसे कम लागत में अधिक रोजगार देने के प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की योजनाओं के साथ ही यहां के लोगों के हाथों में जो कला है उसे निखाकर उन्हें रोजगार से जोडऩे कार्य किया जा रहा है। संभाग में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने पर पूरा जोर है। साथ ही छतवई कालीन हस्तशिल्प केंद्र को पुन: प्रारंभ करने कार्ययोजना है। इसके लिए हमने टीम भी भेजी थी, जो कि पूरी कार्ययोजना तैयार कर रिपोर्ट सौंपेंगे। खादी, हैण्डलूम, माटी व हस्तकला से जुड़े लोगों को रोजगार मिले इसके लिए उन्हें प्रशिक्षित कर स्व-रोजगार से जोडऩे की दिशा में कार्य चल रहा है। यह बातें दिलीप जायसवाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने पत्रिका से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने संभाग में रोजगार की संभावनाओं को लेकर किए जा रहे प्रयासों के संबंध में विस्तार से चर्चा की।
रेशम से दवाइयां व बैंडेड बनाएंगे
रेशम से दवाइयां व बैंडेड बनाने की योजना है। रेशम से जो बैंडेड बनेगा वह बैडेंड अन्य से 30 प्रतिशत कम कीमत के होंगे व ज्यादा लाभकारी होगा। कम समय में घाव को फिलअप करेगा। रेशम की बेहतर डिजाइनिंग के लिए आईआईएम व आईटी से हमारा एमओयू भी हुआ है। साथ ही नर्मदापुरम में रेशम से मेडिसिन बनाने की कार्ययोजना है।
छतवई में फिर से बनेगी कालीन
छतवई स्थित कालीन हस्तशिल्प केंद्र के फिर से दिन लौटेंगे, यहां फिर से कालीन बनाने का काम शुरु किया जाएगा। इसके लिए पिछले सप्ताह ही टीम भेजा था। टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्ययोजना बनाकर इसे पुन: प्रारंभ करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए लगभग 30 करोड़ का प्रस्ताव भी तैयार कर शासन को भेजा है।
कम लागत में अधिक रोजगार देने का प्रयास
कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग कम लागत में ज्यादा रोजगार देने वाला विभाग है। हम खादी, हैण्डलूम, माटी व हस्तकला से जुड़े लोगों को रोजगार से जोडऩे की दिशा में काम कर रहे हैं।
दिलाएंगे प्रशिक्षण
परंपरागत व्यवसाय से जुड़े लोगों को स्व-रोजगार से जोडऩे व उन्हे और दक्ष बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पहले सिर्फ पंजीयन करते थे अब प्रशिक्षित भी करेंगे। योजना के तहत सबसे अधिक पंजीयन मध्य प्रदेश में हुए हैं। हमारा प्रयास है कि प्रशिक्षण दिलाने के मामले में भी सबसे आगे रहें। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षणार्थी को उसे स्व-रोजगार से जोडऩे 15 हजार तक का नि:शुल्क किट प्रदाय किया जाएगा। साथ ही जितने दिन वह प्रशिक्षण लेगा उसे 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से प्रदान किया जाएगा।
अनूपपुर में 25 एकड़ में होगा रेशम उत्पादन
संभाग में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य चल रहा है। अनूपुपर में इसके लिए लगभग 25 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। इसके अलावा संभाग में जहां भी रेशम उत्पादन की संभावना है उन स्थलों को चिन्हित कर इस दिशा में कार्य किया जाएगा। साथ ही निजी क्षेत्र में भी लोगों को इसके लिए प्रेरित किया जा रहा है। कोई व्यक्ति प्राईवेट भूमि पर रेशम उत्पादन करना चाहता है तो खेती, कीड़े व अन्य सामग्री नि:शुल्क प्रदान करेंगे साथ ही लगभग 1 एकड़ में रेशम उत्पादन पर सरकार 3.65 लाख रुपए सरकार अनुदान देगी। साथ ही तो ककून तैयार होंगे उसकी भी सरकार खरीदी करेगी।
Published on:
05 Aug 2024 12:34 pm
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