
Arun Jaitley
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली सोमवार को अपना हैप्पी बर्थडे मना रहे हैं। जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली के घर हुआ था। उनके पिता वकील हैं। वह वर्तमान में देश के वित्तमंत्री हैं और साथ ही सूचना और प्रसारण मंत्रालय का भी जिम्मा संभाल रहे हैं। 1998 से 2004 तक अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वह वाणिज्य, उद्योग और कानून मंत्री रहे थे।
2009 से 2014 तक वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे। नरेंद्र मोदी सरकार में उन्होंने छह महीनों तक रक्षा मंत्री भी रहे। 2014 के आम चुनावों में भाजपा ने उन्हें पंजाब के अमृतसर से टिकट दिया था, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा। पेशे से वकील जेटली दिल्ली हाई कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं।
छात्र नेता के रूप में राजनैतिक करियर
70 के दशक में अरुण जेटली दिल्ली यूनवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्र नेता थे। 1974 में वह छात्र संघ अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे। 1975 से 1977 तक जब देश में आपातकाल लागू था, तब जेटली 19 महीनों तक निवारक नजरबंदी के तहत जेल में बंद रहे। इससे पहले, 1973 में भ्रष्टाचार के खिलाफ राज नारायण और जयप्रकाश नारायण की ओर से शुरू किए गए आंदोलन के प्रमुख नेता थे। आपातकाल के बाद जब वह जेल से रिहा हुए तो संघ के साथ जुड़ गए। 1977 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस को मिली करारी हार के बीच जेटली को दिल्ली एबीवीपी का अध्यक्ष और अखिल भारत सचिव नियुक्त किया गया। 1980 में भाजपा में शामिल होने के कुछ समय बाद ही उन्हें पार्टी के युवा विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
राजनैतिक करियर
जेटली वर्तमान में वित्त और सूचना एवं प्रसारण मंत्री हैं। वह कुछ समय के लिए रक्षामंत्री भी रहे। छात्र नेता रहते हुए जेटली एवीवीपी से जुड़े रहे। 1991 से वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। 1999 के आम चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें प्रवक्ता नियुक्त किया। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी राजग सरकार में 13 अक्टूबर 1999 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। राम जेठमलानी के कानून मंत्री के इस्तीफे के रूप में इस्तीफा देने के बाद 23 जुलाई 2000 को उन्हें कानून मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।
नवंबर 2000 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। सड़क परिवहन मंत्रालय से जहाजरानी विभाग को अलग करने के बाद इस विभाग की जिम्मेदारी भी जेटली को सौंपी गई। भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव निुयक्त होने के बाद उन्होंने एक सितंबर 2001 को जहाजरानी मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 1 जुलाई 2002 को प्रवक्ता नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने विधि मंत्रालय से भी इस्तीफा दे दिया। वह इन पदों पर जनवरी 2003 तक रहे। 29 जनवरी 2003 को उन्हें कैबिनेट में फिर से शामिल किया गया। उन्हें वाणिज्य, उद्योग और विधि मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। मई 2004 में राजग को आम चुनावों में मिली हार के बाद उन्हें फिर से भाजपा का महासचिव नियुक्त कर दिया गया।
जेटली वर्तमान में गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं। 3 जून 2009 को एल के आडवाणी ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता के लिए अरुण जेटली का चयन किया। पार्टी के एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांथ को मानते हुए उन्होंने 16 जून 2009 को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। 26 मई 2014 को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी ने जेटली को अपने कैबिनेट में शामिल कर वित्त और रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी
Published on:
28 Dec 2015 12:46 am
बड़ी खबरें
View Allखास खबर
ट्रेंडिंग
