
तिब्बत के ग्लेशियर
ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ रहे तापमान ने पृथ्वी के सघन बर्फीले इलाकों पर भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। हाल ही वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आया है कि तिब्बत के पठारों पर स्थित किलियान ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है। यहां कई ग्लेशियर्स का समूह है, इनमें लाओहुगोऊ 12 सबसे तेज पिघल रहा है। हाल ही एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पिछले 50 वर्ष में यह 450 मीटर यानी करीब आधा किलोमीटर पीछे चला गया है। 20 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ग्लेशियर और इसके आसपास के क्षेत्र को दुनिया का तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों हिमालय के अन्य ग्लेशियर्स के पिघलने का भी खुलासा हुआ था।
7 प्रतिशत प्रति वर्ष पिघल रहा
कुछ वर्षों से इस पर निगरानी रखने वाली टीम के सदस्य किन जियांग के मुताबिक ग्लेशियर से 13 मीटर यानी करीब 42 फीट मोटी बर्फ की परत गायब हो चुकी है। 1950 के दशक के बाद से इस क्षेत्र के तापमान में औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी हुई है, जो किलियान रेंज में 2,684 ग्लेशियरों के लिए ये खतरनाक है।
Published on:
23 Nov 2020 04:59 pm
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