जग्गोसिंह धाकड़
पाली. जवाई बांध के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद ताजा है। पेयजल और सिंचाई के लिए पानी आरक्षित करने की बैठक पाली में बुलाए जाने का भी विरोध हो रहा है। इस बीच सुमेरपुर के विधायक जोराराम कुमावत ने कहा कि जवाई बांध में हर साल पर्याप्त पानी भरने की गारंटी नहीं है। इसलिए पाली, रोहट, सोजत, मारवाड़ जंक्शन और जैतारण के लिए जोधपुर के रास्ते इंदिरा गांधी नहर परियोजना से पेयजल आपूर्ति की योजना पर कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, जब से यह बांध बना है तब से महज 8 बार ही ओवरफ्लो हुआ है। विधायक जोराराम कुमावत से बातचीत के कुछ अंश यहां प्रस्तुत हैं।
सवाल: जवाई बांध के पानी को लेकर पाली में बैठक बुलाई है, इसका विरोध क्यों हो रहा है।
जवाब: जब से बांध बना, तब से सुमेरपुर में ही बांध के गेस्ट हाउस में बैठक होती रही है। इस बार अधिकारियों ने बिना किसी से पूछे और अकारण बैठक पाली में रख ली है। वहां कोई भाग लेने नहीं जाएगा। पाली में बैठक करने का कोई औचित्य नहीं है।
सवाल: क्या आप पाली जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित बैठक में भाग लेने जाएंगे।
जवाब: विभाग के अधीक्षण अभियंता का फोन आया था, मैने मना कर दिया है कि पाली में बैठक में जाने का अभी कोई इरादा नहीं है। इसमें जल संगम अध्यक्षों के अलावा दो सांसद, दो विधायक और दो कलक्टर को भी भाग लेना होता है।
सवाल: जल विवाद के स्थाई समाधान के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है।
जवाब: जवाई बांध में हर साल पर्याप्त पानी भरने की गारंटी नहीं है। इसलिए पाली, रोहट, सोजत, मारवाड़ जंक्शन और जैतारण को इंदिरा गांधी नहर से पानी दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही जवाई बांध के पुनर्भरण की योजना को मूर्त रूप देने की जरूरत है। इसके लिए भाजपा सरकार ने 6 हजार करोड़ की योजना बनाई थी, जो सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में चल गई।
सवाल: जवाई बांध पुनर्भरण योजना में क्या खामी थी, जो सरकार ने शुरू नहीं कराई।
जवाब: योजना में कोई खामी नहीं है, कांग्रेस सरकार की नीयत ठीक नहीं है। वह योजना भाजपा सरकार के समय प्रस्तावित की गई थी, सिर्फ इसलिए ही मूर्त रूप नहीं दिया गया। साबरमती बेसिन के तीन बांधों से पुनर्भरण के लिए पानी लाया जा सकता है।
सवाल: क्या अब पुनर्भरण की योजना के मूर्त लेने की उम्मीद है।
जवाब: जब ये योजना भाजपा सरकार में बनी थी तब 6 हजार करोड़ की थी, जब इसका मुद्दा बार-बार विधानसभा में उठाया तो राज्य सरकार ने 3 हजार करोड़ योजना बनाने की सहमति दी है। राज्य सरकार की नीयत ठीक तो योजना मूर्त रूप ले सकती है।