
जीसैट-31 ऑपरेशनल कक्षा में स्थापित
सभी मैनुवर सफलतापूर्वक पूरे
बेंगलूरु. देश के अत्याधुनिक संचार उपग्रह जीसैट-31 को ऑपरेशनल कक्षा में पहुंचा दिया गया है। इसके लिए उपग्रह को कक्षा में उठाने की तीन प्रक्रियाएं पूरी की गईं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार जीसैट-31 अब भू-स्थैतिक कक्षा में पहुंच गया है। उपग्रह का एंटीना तैनात हो चुका है और जल्द ही यह सेवाएं देने लगेगा।
इसरो ने कहा है कि जीसैट-31 पृथ्वी से निकटतम (पेरिगी) 35,548 किमी और अधिकतम (एपोगी) 35,778 किमी की दूरी पर है। इस कक्षा में उपग्रह 0.13 डिग्री पर झुका हुआ है। जीसैट-31 को फ्रेंच गुयाना के कौरू प्रक्षेपण स्थल से पिछले 6 फरवरी तडक़े 2:31 बजे लॉन्च कर सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाया गया था। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के रॉकेट एरियन-5 वीए-247 ने उपग्रह को अंडाकार भू-स्थैतिक अंतरण कक्षा (जीटीओ) में स्थापित किया था। तब उसकी पृथ्वी से निकटतम दूरी (पेरिगी) 250 किमी और पृथ्वी से अधिकतम दूरी (एपोगी) 35 हजार 8 50 किमी थी। विषुवत रेखा पर यह उपग्रह 3 डिग्री के कोण पर झुका हुआ था। इसके बाद तीन कक्षीय परिवर्तन कर उसे दीर्घवृत्ताकार भू-स्थैतिक कक्षा में भेज दिया गया है।
लगभग 2536 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह देश की केयू बैंड ट्रांसपोंडर क्षमता बढ़ाएगा। अगले 15 वर्ष तक यह उपग्रह वीसैट-नेटवर्क, टेलीविजन अपलिंक, डिजिटल उपग्रह समाचार संग्रह, डीटीएच टेलीविजन सेवाओं, सेलुलर कनेक्टिविटी और ऐसे कई सेवाएं प्रदान करेगा। इसके अलावा यह देश के विशाल महासागरीय क्षेत्र में संचार सेवाओं का आधार बनेगा। इसके व्यापक केयू बैंड ट्रांसपोंडर अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर में संचार सेवाएं मुहैया कराएंगे।
Published on:
12 Feb 2019 09:24 pm
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