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प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थल है हाड़ौती के वेटलेंड

जिले की प्राकृतिक आबोहवा देशी-विदेशी परिंदों को रास आने लगी है तथा यहां के जलस्रोत व सघन जंगलों में हर साल रंग-बिरंगे परिंदों का कलरव बढ़ने लगा है।

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बूंदी

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pankaj joshi

May 12, 2024

प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थल है हाड़ौती के वेटलेंड

गुढ़ानाथावतान क्षेत्र के अभयपुरा बांध में जलक्रीड़ा करते प्रवासी पेलिकन पक्षियों का समूह।

बूंदी. गुढ़ानाथावतान. जिले की प्राकृतिक आबोहवा देशी-विदेशी परिंदों को रास आने लगी है तथा यहां के जलस्रोत व सघन जंगलों में हर साल रंग-बिरंगे परिंदों का कलरव बढ़ने लगा है। हाड़ौती क्षेत्र की चम्बल की खूबसूरत वादियों व जिले के भीमलत व बरड़ वन क्षेत्र में लुप्त होते गिद्धों की कुछ प्रजातियां फिर दिखाई देने लगी है, जिनमें उत्तरी चीन, मंगोलिया से आने वाले बड़े आकार वाला यूरेशियन काला गिद्ध भी शामिल है।

इसके अलावा यहां इस साल हिमालयन ग्रिफान, इजिप्शियन व भारतीय गिद्ध भी दिखाई दिए है। स्पेन, दक्षिणी अफ्रीका व मध्य यूरोप से भारत के दक्षिणी- पूर्वी राज्यों में शीतकालीन प्रवास पर आने वाले ब्लैक स्टोर्क पक्षी भी अभयपुरा बांध पर करीब एक माह तक जमे रहे थे। प्रवासी ब्लैक स्टोर्क, काला गिद्ध व ग्रेटर बीटर्न पक्षी पहली बार दिखाई दिए है। इसके अलावा नोर्थन शोवलर, सुर्खाब, पोचार्ड, पेलिकन सहित 2 दर्जन से अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षी सर्दी के दिनों में यहां के जलाशयों पर जलक्रीड़ा करते देखे जा सकते है। रामगढ विषधारी टाइगर रिजर्व के अस्तित्व में आने के बाद से यहां का पर्यावरण तंत्र बेहतर हुआ है और इसका असर आने वाले समय में वन्यजीवों के साथ प्रवासी पक्षियों पर भी देखने को मिल सकता है।

परिंदों के कलरव से आबाद रहते हैं जलाशय
जिले के सदाबहार जलाशयों में सर्दी की शुरुआत के साथ ही मेहमान परिंदों का कलरव सुनाई देने लगता है।बूंदी-चित्तौड़ मार्ग स्थित रामनगर के छोटे तालाब वेट-लेंड पर हजारों प्रवासी पक्षी हर साल आते है। इस तालाब के बीच बने टापुओं पर दिनभर प्रवासी, अन्तरप्रवासी व स्थानीय पक्षियों की करीब 50 प्रजातियों की भी उपस्थिति देखी जाती है। यहां सर्दियों में कुरजां पक्षी आकर्षण का केंद्र रहता है। बरधा सहित दो दर्जन बांधों व तालाबों पर प्रवासी व अन्तरप्रवासी पक्षी काफी संख्या में पहुंचते है। इनमें चीन-मंगोलिया जैसे ठंडे प्रदेशों में बर्फबारी शुरू होने के साथ आने वाले बार- हेडेड गूज व ग्रे- लेग गूज भी शामिल है। यूरोप महादीप से आने वाले यूरोपियन पिनटेल व नोर्थन शोवलर भी बूंदी के अधिकांश जल-स्रोतों पर दस्तक देते है। इसी प्रकार गुजरात में कच्छ के रण से आने वाले अन्तरप्रवासी ग्रेटर-फ्लेमिंगो व जिले के बरधा बांध तक सिमटे सारस पक्षी भी आकर्षण का केंद्र बने हुए है।

पेटाकाश्त से परिंदों के प्रवास में खलल
जिले के सभी बांधों व तालाबों में मछली ठेका होने से पक्षियों के प्राकृतिक आश्रय-स्थल छिन से गए है। मछली ठेकेदार के कार्मिक मछलियों को पक्षियों से बचाने के लिए दिन भर बांध व तालाबों पर आतिशबाजी के धमाके कर पक्षियों की स्वच्छंदता में विध्न पैदा करते है। इसी प्रकार बांधों व तालाबों में अवेध पेटा-काश्त पर भी रोक नहीं लग पाना चिंता का विषय है। हिण्डोली के गुढ़ा बांध व तालेड़ा के बरधा में चोरी-छिपे पक्षियों का शिकार भी होता है।