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विरासत की गोद में कुछ यूं चहकता था जयपुर

आज जयपुर अपना बर्थडे मना रहा है। आइए देखिए ये शहर कितना खूबसूरत है। इस शहर की विरासत बेहद खास थी। जयपुर शहर की भोर बनारस सी खिलती थी...दोपहरी प्रयाग सी चमकती थी...शाम अवध सी रोशन थी और रात में बुंदेलखंड की जैसी जगमगाहट थी।

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जयपुर

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Jaya Sharma

Nov 18, 2023

किसी जमाने में सूरजपोल से जब भोर की पहली किरण खिलती थी, तो शहर में बनारस की छटा बिखर जाती थी

विरासत की गोद में कुछ यूं चहकता था जयपुर

किसी जमाने में सूरजपोल से जब भोर की पहली किरण खिलती थी, तो शहर में बनारस की छटा बिखर जाती थी। ऐसा लगता था मानो बनारस के घाट की चमक शहर में छा गई हो। गुलाबी रंग की दिवारों पर जब सूर्य की किरणे पड़ती थी एक अलग ही आभा छाने लगती थी। फिर दोपहर का तो €या ही कहना...सूरजपोल से जैसे ही सूरज आगे बढ़ता था, तो रामगंज चौपड़ से लेकर बड़ी चौपड़ पर करीब 11 से दो बजे का नजारा देखते ही बनता था। यहां की दोपहरी प्रयाग सी चमकती थी। जिस तरह प्रयाग में दोपहर में एक शांत और सुकून भरा माहौल होता था, उसी तरह रामगंज चौपड़ में भी सुकून भरी दोपहरी होती थी। यहां 11 से दो बजे तक बरामदों के बाहर बंधे हुए घोडे़ आराम करते थे। फिर जैसे ही दोपहर ढलने लगती, तो छोटी चौपड़ से लेकर चांदपोल की रौनक अवध की शाम जैसी हो जाया करती थी। लोग बरामदों में ताश ,चंगा पो और शतरंज खेला करते थे।

अवध की तरह नवाबी शाम
यहां की शाम अवध की तरह सजती थी, जहां नाच-गाने के कार्यक्रम होते थे और फिर जब चांद पूरी रंगत बिखेरता था, तब पुरानी बस्ती और ब्रह्मपुरी इलाके में तमाशे और गायन के कार्यक्रम होते थे। ये रात बिल्कुल बुंदेलखंडी अंदाज में सजती थी, जहां मंदिरों में पूजा होती थी। साथ ही देर रात तक गालीबाजी का दौर चलता था।

जयपुर में था चार जगहों का आनन्द
ढूंढाड़ी इतिहास के जानकारों के अनुसार भोर बनारस, प्रयाग की दोपहरी, अवध की शाम और बुंदेलखंड की रात के लिए कहा जाता था कि जब कोई व्यक्ति जीवन से निराश और हार गया हो तो इन चारों जगहों पर एक बार जरूर जाए। उसकी जिन्दगी में सकारात्मक उर्जा भर जाएगी और इतिहास के जानकार मानते हैं कि इन चारों जगहों का आनन्द जयपुर में लिया जाता था। सालों पहले यहां सुबह से रात तक अलग ही माहौल हुआ करता था।