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हद कर दी आपने : यूडीए 20 साल बाद भी तय नहीं कर सका रूपसागर का पेटा…खतरे में तालाब

तालाब के पेटे और कैचमेंट एरिया में मकान, बाउंड्रीवाल और भूखंडों के अवैध निर्माण हो रहे हैं, जबकि सरकारी सीमा चिन्ह भी गायब हो चुके हैं। यूडीए और अन्य विभागों के बीच सीमा विवाद फाइलों में उलझा हुआ है और कार्रवाई अब तक अधूरी है।

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रूपसागर तालाब 

उदयपुर. शहर के बीचों-बीच स्थित रूपसागर तालाब आज केवल अतिक्रमण की मार नहीं झेल रहा, बल्कि सरकारी असमंजस और प्रशासनिक लापरवाही की ऐसी मिसाल बन चुका है, जहां अधिकारी आज तक यह तय नहीं कर पाए कि तालाब का वास्तविक पेटा आखिर कहां तक है। हालात इतने उलझ चुके हैं कि एक ओर यूडीए ने वर्षों पहले तालाब सीमा मानते हुए लाल मुटाम गाड़ दिए, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि जिस क्षेत्र को डूब क्षेत्र बताकर रोका गया, वहां कभी पानी आया ही नहीं।यही वजह है कि अब तालाब पेटे में मकान बन रहे हैं, बाउंड्रीवाल खड़ी हो रही है, भूखंडों के सौदे हो रहे हैं और शिकायतें यूडीए तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई अधर में लटकी हैं। अधिकारी खुद तय नहीं कर पा रहे कि गलत कौन है मुटाम या मकान बनाने वाले।

2006 की बारिश बनी विवाद की जड़

स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2006 में भारी बारिश के दौरान किसी ने रूपसागर तालाब की प्राकृतिक पानी निकासी को बंद कर दिया था। इससे पानी का फैलाव सामान्य सीमा से पीछे तक पहुंच गया। विभाग ने उसी अस्थायी स्थिति को स्थायी मानते हुए वहां तक लाल मुटाम लगा दिए। लोगों का कहना है कि वास्तविकता में उस क्षेत्र में कभी पानी नहीं आया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसे डूब क्षेत्र मान लिया गया। बाद में तत्कालीन यूडीए अधिकारियों ने इस विसंगति को लेकर सरकार को पत्र भी लिखा, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। अब एक बार फिर जल संसाधन विभाग से तालाब की वास्तविक सीमा और स्थिति का रिकॉर्ड मांगा गया है।

तालाब के चारों ओर फैला कंक्रीट

रूपसागर तालाब के चारों ओर अब अतिक्रमण इस हद तक बढ़ चुका है कि यूडीए की ओर से लगाए लाल मुटाम तक गायब हो चुके हैं। तालाब के कैचमेंट एरिया में लगातार कब्जे हो रहे हैं और पानी की आवक वाले प्राकृतिक रास्तों पर दस-दस फीट तक मलबा डालकर भराव कर दिया गया है। चित्रकूटनगर की पहाड़ियों से आने वाला बरसाती पानी पहले सीधे रूपसागर तालाब में पहुंचता था, लेकिन अब अधिकांश रास्ते बंद हो चुके हैं। तालाब पेटे में कई लोगों ने बाउंड्रीवाल बना ली है तो कुछ ने मकानों के ढांचे तक खड़े कर दिए हैं। भूमाफिया खुलेआम भूखंडों के सौदे कर रहे हैं और बिना स्वीकृति निर्माण कार्य जारी है। स्थिति यह है कि आसपास आबादी बस चुकी है, लेकिन वहां आज तक पक्की सड़कें नहीं हैं। सीवर और नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है।

फाइलें चली, समितियां बनीं... लेकिन फैसला अब भी अधूरा

रूपसागर क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण और विवादित सीमा को लेकर यूडीए अधिकारियों ने पूर्व में सरकार से मार्गदर्शन मांगा था। तत्कालीन जिला कलक्टर को भी जल संसाधन विभाग, राजस्व विभाग और यूडीए अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर सीमा निर्धारण कराने का प्रस्ताव भेजा गया था, ताकि निर्माण स्वीकृति, पट्टों और अतिक्रमण संबंधी शिकायतों पर स्पष्ट कार्रवाई हो सके। लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। न तो तालाब की वास्तविक सीमा तय हो पाई और न ही अवैध निर्माण रुक पाए।

रूपसागर तालाब की वास्तविक स्थिति और सीमा निर्धारण को लेकर जल संसाधन विभाग से रिकॉर्ड और तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हेमेन्द्र नागर, यूडीए सचिव