
मधुमक्खी पालन से बदली किसान की तकदीर
59 बॉक्स से शुरुआत, अब 700 बी बॉक्स
रामकिशोर ने बताया, उन्होंने 2002 में 59 बॉक्स से मधुमक्खी पालन शुरू किया था। हिमाचल के मधुमक्खी पालक से बी कीपिंग बॉक्स लेकर आए थे। आज लगभग ७०० बी बॉक्सेज के जरिए शहद एकत्र कर रहे हैं।
वर्षभर चलता है व्यवसाय
उन्होंने बताया, बी कीपिंग का व्यवसाय जनवरी से दिसम्बर तक चलता है। वह जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल तक जाकर बी कीपिंग करते हैं। नवम्बर से फरवरी तक गांव में ही सरसों की फसल पर तथा मार्च-अप्रेल तक कोटा, झालावाड़ साइड में धनिया के खेतों पर मधुमक्खी पालन करते है। बसंत ऋतु में बी बॉक्सों को जम्मू ले जाते हैं। वहां पर पहाड़ी पेड़ पौधों पर मधुमक्खियां रस चूसकर शहद बनाने लगती हैं। इसके बाद कश्मीर व पंजाब में सीजन आ जाता है, वहां बॉक्स लेकर रख देते है। इस प्रकार वर्षभर यह व्यवसाय चलता रहता है।
दिल्ली, पंजाब, भरतपुर में बिक्री
अपनी कंपनी के माध्यम से वह दिल्ली, पंजाब, भरतपुर व हिमाचल प्रदेश तक मार्केटिंग करते हैं। स्थानीय स्तर पर भी शहद बिक जाता है। शहद से दवाइयां बनाने वाली कम्पनियों को बड़े पैमाने पर बेचते है। 90 से 110 रुपए प्रति किलोग्राम की दर पर शहद की कीमत मिल जाती है।
- रामकिशोर, मधुमक्खी पालक
ऐसे तैयार होता है शहद
एक बक्से में पांच से सात हजार मधुमक्खियां रहती हैं। इसमें एक रानी मधुमक्खी तथा कुछ नर मधुमक्खियां, श्रमिक तथा बच्चे होते हैं। एक दिन में रानी मधुमक्खी 1500 से 2000 अंडे देती है। बी बॉक्सेज को सरसों, धनियां, विलायती कीकर, अजवाइन, सौंफ, शीशम, लीची, बेर, जामून आदि के खेतों के पास रख देते हैं। तीन किमी की रेंज से मधुमक्खियां फूलों से रस लाकर बक्से के छते में भरती हैं। वर्कर मधुमक्खी अपने पंख से रस को सुखाती है और इससे मधु तैयार होता है। प्रोसेसिंग यूनिट में मशीनों से शहद निकाल कर पैक कर दिया जाता है।
- भगवान सहाय यादव
Published on:
04 Dec 2023 04:33 pm
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