
हिन्दू व्यक्ति के धर्म परिवर्तन करने के बाद जन्मी संतान को संपत्ति का अधिकार नहीं
भारत में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के अंतर्गत बिना वसीयत किए स्वर्गवासी होने वाले हिंदू पुरुष और स्त्री की संपत्ति उत्तराधिकार के संबंध में प्रवाधानों को रेखांकित करता है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के तहत, उत्तराधिकार का निर्धारण किया गया है। अधिनियम के अंतर्गत संपत्ति से बेदखल किए जाने के संबंध में भी बताता है। अधिनियम की धारा 26 के अनुसार, अगर कोई हिंदू धर्म परिवर्तन करता है तो कानून उसे संपत्ति का उत्तराधिकार देता है। लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद हुई संतान को यह हक नहीं होगा।
धारा 25 ये कहती
इसके अनुसार किसी हिंदू का अन्य धर्म अपना लेने से वह हिंदू नहीं रह जाता। ऐसे में धर्म परिवर्तन के बाद जन्मी संतान का भी उसकी किसी संपत्ति पर अधिकार नहीं रह जाता। यह अधिनियम की धारा 2 में स्पष्ट भी किया गया है।
यह प्रावधान भी है
हालांकि, इस अधिनियम के तहत धर्म बदलने से पहले व्यक्ति की अगर कोई संतान है, तो उन्हें राहत दी गई है। इस प्रावधान के अंतर्गत ऐसे व्यक्ति की धर्म परिवर्तन से पहले पैदा हुई संतान को संपत्ति के उत्तराधिकार के संदर्भ में योग्य माना जाएगा।
यही तीन मुख्य बिंदु
अधिनियम की धारा 25 और 26 के अंतर्गत संपत्ति से बेदखल किए जाने के प्रमुख रूप से ये तीन कारण ही दिए गए हैं। इनके अलावा, संपत्ति से बेदखल करने का ऐसा कोई भी प्रमुख कारण नहीं है। यह अधिनियम केवल इन तीन परिस्थितियों में ही संपत्ति से बेदखल कर सकता है।
Published on:
09 Dec 2020 02:57 pm
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