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चुनावों में महिलाओं की दावेदारी लगातार बढ़ी तो लहराया परचम

महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व पहली लोकसभा के पांच प्रतिशत से बढ़कर 17वीं लोकसभा में 14 फीसदी से अधिक हो गया है।

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जयपुर

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Kiran Kaur

Jan 06, 2023

चुनावों में महिलाओं की दावेदारी लगातार बढ़ी तो लहराया परचम

चुनावों में महिलाओं की दावेदारी लगातार बढ़ी तो लहराया परचम

भारतीय महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं और अब वे राजनीति में भी पीछे नहीं। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार है कि राज्यसभा और लोकसभा में महिला सांसदों की कुल संख्या 100 से अधिक है। संसद में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी महिला सशक्तीकरण का बेहतरीन उदाहरण है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में 62 महिला सांसद चुनी गई थीं, यह संख्या वर्ष 2019 में बढ़कर 78 हो गई। महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व पहली लोकसभा के पांच प्रतिशत से बढ़कर 17वीं लोकसभा में 14 फीसदी से अधिक हो गया है।

उम्मीदवारी बढ़ी तो जीत भी बढ़ गई:

राजस्थान के वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों में 12 महिलाओं ने जीत का ताज पहना था लेकिन 15 वर्ष बाद यह संख्या दोगुनी हो गई। चुनावों में किस्मत आजमाने वाले पुरुष उम्मीदवार वर्ष 2003 से 2018 तक घटते-बढ़ते रहे लेकिन महिला नेताओं की संख्या में हर बार वृद्धि ही हुई। मध्य प्रदेश में भी बीते दो विधानसभा चुनावों में महिला उम्मीदवार बढ़ीं, यही स्थिति छत्तीसगढ़ में भी रही। जबकि यहां वर्ष 2013 के मुकाबले 2018 में अधिक महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं।

राज्यों में राजनीतिक सक्रियता:

देशभर की विधानसभाओं में महिला विधायकों की औसत संख्या आठ फीसदी है। जिन राज्यों में महिला विधायकों का प्रतिनिधित्व 10 फीसदी से अधिक है, उनमें छत्तीसगढ़ , पश्चिम बंगाल , झारखंड , राजस्थान , उत्तर प्रदेश , दिल्ली और उत्तराखंड, बिहार और हरियाणा शामिल हैं। हालांकि कई राज्यों में महिलाओं के लिए यह राह इतनी आसान भी नहीं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात सहित 19 राज्यों में 10 प्रतिशत से भी कम महिला विधायक हैं।